'सेक्युलर ढांचे के खिलाफ…', कृषि भवन की सदियों पुरानी 'कदीमी मस्जिद' हटाई जाएगी; केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

केंद्र ने कोर्ट को बताया कि कृषि भवन और उससे सटे शास्त्री भवन की जगह पर ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ की 4 और 5 नंबर की इमारतें बनाई जानी हैं.

Qadeemi Masjid, Central Vista redevelopment, Delhi High Court, Krishi Bhawan, Land and Development Office

याचिकाकर्ता समिति की ओर से संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मस्जिद को न तोड़े जाने की गुहार लगाई गई थी. (Image- ANI)

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर कहा है कि लुटियंस दिल्ली स्थित कृषि भवन परिसर में मौजूद सदी पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ को हटाया जाएगा. सरकार ने साफ किया है कि ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ के लिए इससे हटाना जरूरी है. इस कदम का बचाव करते हुए केंद्र ने कोर्ट में कड़ा रुख अपनाया और दलील दी कि किसी भी केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालय परिसर के भीतर स्थायी धार्मिक ढांचे की मौजूदगी ‘सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के लिए पूरी तरह असंगत और अस्वीकार्य है.’

विज्ञापन

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि और विकास कार्यालय द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि यह जमीन पूरी तरह केंद्र सरकार के स्वामित्व में है. 1940 में एक समझौते के तहत मस्जिद की देखरेख समिति को केवल सशर्त कब्जा दिया गया था, जो किसी भी प्रकार का स्थायी कानूनी अधिकार नहीं देता.

विज्ञापन

केंद्र ने कोर्ट को बताया कि कृषि भवन और उससे सटे शास्त्री भवन की जगह पर ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ की 4 और 5 नंबर की इमारतें बनाई जानी हैं. सरकार ने इस निर्माण कार्य को ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय महत्व’ की परियोजना करार देते हुए कहा कि स्वीकृत सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान में किसी भी स्थायी धार्मिक ढांचे के लिए कोई जगह आरक्षित रखना संभव नहीं है.

जाब्ता गंज मस्जिद का दिया विकल्प

याचिकाकर्ता समिति की ओर से संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मस्जिद को न तोड़े जाने की गुहार लगाई गई थी. इसे खारिज करते हुए केंद्र ने कहा कि किसी सरकारी जमीन पर, जहां केवल अनुमति के आधार पर कब्जा मिला हुआ हो किसी खास स्थान पर ही नमाज पढ़ने की जिद करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है.

विज्ञापन

केंद्र ने विकल्प सुझाते हुए कहा कि कृषि भवन से महज दो किलोमीटर के दायरे में इंडिया गेट के पास ऐतिहासिक ‘शाही मस्जिद जाब्ता गंज’ मौजूद है, जहां कर्मचारी और नमाजी आसानी से नमाज अदा करने जा सकते हैं.

दशकों पुरानी मस्जिद

कदीमी मस्जिद दशकों से कृषि भवन, शास्त्री भवन और आसपास के सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों के लिए इबादत की जगह रही है. मस्जिद की देखरेख समिति ने सितंबर में इसे तोड़े जाने से बचाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था. समिति ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध न करते हुए केवल मस्जिद को बनाए रखने या पास में कोई वैकल्पिक प्रार्थना स्थल देने की मांग की थी.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ