क्या है 'इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर', जिसमें बदलाव के लिए राष्ट्रपति मुर्मू ने किया अपनी खास शक्ति का इस्तेमाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी स्पेशल पावर का इस्तेमाल करते हुए सोमवार को ‘अंतर-राज्य परिषद आदेश, 1990’ (Inter-State Council Order) में संशोधन किया.

President Droupadi Murmu

क्या है 'इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर', जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू ने किया संशोधन (Photo: X ( @rashtrapatibhvn )

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी स्पेशल पावर का इस्तेमाल करते हुए सोमवार को ‘अंतर-राज्य परिषद आदेश, 1990’ (Inter-State Council Order) में संशोधन किया. इसका मकसद ये सुनिश्चित करना है कि जब राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में कोई खास संवैधानिक या कानूनी प्रावधान लागू हों, तो अंतर-राज्य परिषद की बैठकों में वहां के राज्यपाल और उप-राज्यपाल भी शामिल हो सकें. गृह मंत्रालय ने 9 सितंबर को इस संशोधन का नोटिफिकेशन जारी किया था. इसमें बताया गया कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ‘अंतर-राज्य परिषद आदेश, 1990’ में संशोधन का आदेश दिया.

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क्या है ‘इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर’?

‘इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर’ भारत के राष्ट्रपति ने 28 मई 1990 को जारी किया. ये वो आधिकारिक आदेश है, जिसके तहत संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत इंटर स्टेट काउंसिल की स्थापना की गई थी. इसका मकसद केंद्र, राज्यों और बाकी स्टेट्स के बीच आपसी तालमेल बनाना है. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और इसके सदस्य राज्यों के सीएम, विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और बिना असेंबली वाले केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक होते हैं. ये काउंसिल एक सलाहकार के तौर पर काम करता है. इसका काम है केंद्र-राज्य या इंटर स्टेट विवादों, साझा हितों के विषयों पर जांच करना, चर्चा करना और नीतियों में बेहतर तालमेल के लिए सलाह देना.

अब क्या बदलेगा?

संशोधित आदेश के तहत ‘इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर, 1990’ के क्लॉज 2 में मौजूद प्रावधान की जगह एक नया प्रावधान लाया गया है. इसमें उन चार स्थितियों के बारे में बताया गया है, जिनमें गवर्नर या लेफ्टिनेंट गवर्नर को काउंसिल की बैठकों में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा. नोटिफिकेशन के मुताबिक, जब संविधान के आर्टिकल 356 के तहत राष्ट्रपति का आदेश किसी राज्य में लागू हो, तो उस राज्य के गवर्नर को इंटर-स्टेट काउंसिल की बैठकों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा.
इसी तरह, जब नेशनल कैपिटल टेरिटरी (NCT) से जुड़े आर्टिकल 239AB के तहत राष्ट्रपति का कोई आदेश लागू हो, तो NCT के लेफ्टिनेंट गवर्नर को बैठकों में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा.

पुडुचेरी भी शामिल

संशोधित आदेश में पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल है. अगर ‘गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज़ एक्ट, 1963’ की धारा 51 के तहत राष्ट्रपति का कोई आदेश लागू है, तो पुडुचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर को काउंसिल की बैठकों में शामिल होने के लिए न्योता भेजा जाएगा. जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के मामले में लेफ्टिनेंट गवर्नर को तब बुलाया जाएगा जब ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019’ की धारा 73 के तहत राष्ट्रपति का कोई आदेश लागू हो.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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