BRICS Joint Tree Plantation Programme: भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिक्स सदस्य देशों के टॉप लीडर्स ने शनिवार, 11 सितंबर 2026 को 18वें शिखर सम्मेलन के वेन्यू भारत मंडपम के बाहर लॉन में एक ज्वॉइंट प्लांटेशन प्रोग्राम में हिस्सा लिया. समित के दौरान सभी नेता ग्रुप फोटो के लिए एक साथ आए और एनवायरनमेंट के लिए अहम कदम उठाया. लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा था कि इन मुल्कों के लीडर्स ने कौन से पेड़ लगाए, तो चलिए हम आपको इसी डिटेल बनाने जा रहे हैं.
भारतीय संस्कृति की झलक
आपको बता दें कि ये बरगद का पौधा है, जो भारत में बहुत ज्यादा इकोलॉजिकल, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अहमियत रखता है.इसका साइंटिफिक नाम फिकस बेंगालेंसिस (Ficus benghalensis) है. अपने विशाल फैलाव और खास लटकती जड़ों के लिए पहचाना जाने वाला ये पेड़ बहुत बड़ा और लंबे समय तक जीवित रहने वाला पौधा है, जो कई तरह के पक्षियों, कीड़ों और दूसरे जंगली जीवों को आशियान और भोजन देता है. इसकी घनी पत्तियां छांव भी देती हैं और आस-पास के माहौल को ठंडा रखने में मदद करती हैं, जिससे ये शहरी और ज्यादा आबादी वाली जगहों पर खास तौर पर फायदेमंद हो जाता है.
लंबे वक्त तक जिंदा रहने वाला पेड़
बरगद का पेड़ भारतीय परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा है और इसे लंबी उम्र, स्टेबिलिटी, मजबूती और कंसिस्टेंसी का प्रतीक माना जाता है. भारत के कई हिस्सों में इस पेड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक अहमियत है और लोग पारंपरिक रूप से इसकी हिफाजत करते हैं. कई दशकों तक जिंदा रहने और बड़े इलाके में फैलने की क्षमता के कारण, इसे अक्सर लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों और सामूहिक विकास का प्रतीक माना जाता है.
प्लांटेशन के पीछे की वजह
कभी-कभी प्लांटेशन प्रोग्राम के लिए बरगद के पेड़ों को चुना जाता है क्योंकि वो हरे-भरे लैंडमार्क बन सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लॉन्ट टर्म कमिटमेंट को दिखाते हैं. इसे लगाने से आने वाली पीढ़ियों के लिए कुदरत की देखभाल करने का एक सिंबॉलिक मैसेज मिल सकता है. इसका चौड़ा फैलाव अच्छी छाया दे सकता है, जबकि इसके फल कई तरह के पक्षियों और जानवरों के काम आते हैं. जैसे-जैसे पेड़ बड़ा होता है, इसकी फैलती जड़ें और शाखाएं एक खास नेचुरल हैबिटेट भी बना सकती हैं.
खुली जगहों के लिए परफेक्ट
हालांकि बरगद के पेड़ों को काफी जगह की जरूरत होती है और ये इमारतों, सड़कों, जमीन के नीचे की यूटिलिटी लाइनों या तंग शहरी इलाकों के पास लगाने के लिए सही नहीं होते हैं. इन्हें बड़े पार्कों, इंस्टीट्यूशन के कैंपस, गांवों की बड़ी जमीनों और ऐसी दूसरी जगहों पर लगाना सबसे अच्छा होता है जहां इनके बड़े फैलाव को सुरक्षित तौर पर जगह दी जा सके. गांव में अक्सर पंचायत इसी पेड़ के नीचे लगती है.
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