RSS चीफ मोहन भागवत ने गुरुवार को नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में हुए एक प्रोग्राम के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने Gen Z और Gen Alpha के युवाओं से संवाद किया. जब RSS चीफ से पूछा गया कि शिक्षा और नौकरी में रिजर्वेशन लागू है, जिससे जनरल कैटेगरी के बच्चों के साथ भेदभाव होता है. इस पर जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा- इस पर मैं आपको सीधा जवाब नहीं दूंगा. आरक्षण के पीछे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की सोच को देखना चाहिए. उसे ईमानदारी से फॉलो करें, तो कोई दिक्कत नहीं है. जब तक सामाजिक भेदभाव चलेगा, तब तक रिजर्वेशन भी जारी रहेगा.

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'आरक्षण पर राजनीति नहीं होनी चाहिए'

भागवत ने आगे कहा- जिनको रिजर्वेशन मिल गया और वो उस श्रेणी से बाहर आ चुके हैं उन्हें खुद से इसका त्याग करना चाहिए. रिजर्वेशन अपलिफ्टिंग के लिए है. एक बार इसका इस्तेमाल करने के बाद खुद बाकी लोगों के लिए इसे छोड़ देना चाहिए. रिजर्वेशन सामाजिक एकता के लिए लाया गया है. आरक्षण पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसपर राजनीति हुई है. क्लाइमेट चेंज पर मोहन भागवत से पूछा गया कि पर्यावरण के बारे में Gen-Z और Gen Alpha के युवा जब भी आवाज उठाते हैं, सरकार नहीं सुनती. इसपर उन्होंने कहा- सभी पर्यावरण को लेकर बात करते है. हमें अपने डेवलपमेंट मॉडल को बदलना पड़ेगा. इस पर सोसाइटी को आगे काम करना चाहिए.

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और क्या बोले RSS चीफ?

कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बारे में भी खुलकर अपनी बात रखी. RSS चीफ ने कहा- ''आंदोलन भी एक संवाद का माध्यम है. चेतना जगाने के लिए ऐसा करना सही है. भारत की शिक्षा में बहुत कुछ करने की जरूरत है. संवाद होना चाहिए, अगर बातचीत नहीं हो रही तो आगे की प्लानिंग कैसे होगी. मैं ये नहीं कहूंगा कि Gen Z को आंदोलन नहीं करना चाहिए. लेकिन ऐसा करने का भी एक सही तरीका है. बाबा साहेब ने जो संविधान लिखा है, उसे पढ़ना चाहिए.'' उन्होंने कहा- ''हमें उनकी बात सुननी चाहिए. उनसे बातचीत में कमी थी, इसीलिए जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ.'' मोहन भागवत ने आगे कहा- ''Gen Z अगर प्रोटेस्ट कर रहा है तो उसका मतलब वो एंटी नेशनल नहीं है. लेकिन संवाद होना चाहिए और उसमें अपनापन होना चाहिए.'' RSS प्रमुख ने कहा- अगर आंख मूंदकर विश्वास करने के लिए कहेंगे तो मैं Gen Z पर विश्वास करूंगा.''

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