मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच तेल की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर मचे शोर पर सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है. सरकारी सूत्रों ने सोमवार को भरोसा दिलाया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल इजाफे की कोई योजना नहीं है. साथ ही कहा कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं चली जातीं, तब तक घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहेंगी.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है. भारत के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सरकार को उम्मीद है कि कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के आसपास ही बना रहेगा. देश के किसी भी पंप पर पेट्रोल-डीजल की किल्लत जैसी कोई समस्या नहीं है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है.

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इसके साथ ही ईरान की ओर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की धमकियों के बीच, भारत ने वैकल्पिक रास्तों से कच्चा तेल मंगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इसके अलावा, विमानन ईंधन (ATF) को लेकर भी सरकार ने साफ किया है कि भारत ATF का बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, इसलिए विमानन क्षेत्र में ईंधन की कोई कमी नहीं होगी. साथ ही सूत्रों ने कहा कि दूसरे देशों की तुलना में भारत की स्थिति अच्छी है.

घरेलू एलपीजी (LPG) की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है. अब एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है. देखा गया था कि जो लोग पहले 55 दिनों में सिलेंडर बुक करते थे, उन्होंने घबराहट में 15 दिनों में ही बुकिंग शुरू कर दी थी.

साथ ही सूत्रों ने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LNG की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने के लिए औद्योगिक इस्तेमाल वाली LNG को जरूरत पड़ने पर घरेलू इस्तेमाल की ओर डायवर्ट किया जाएगा. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किसी तरह का कटौती करने की योजना नहीं है.

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सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी प्रोडेक्शन बढ़ाने का आदेश दिया है. व्यावसायिक कनेक्शन के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी. अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों ने भारत को एलपीजी बेचने के लिए संपर्क किया है.

इसके साथ ही भारत की अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ समन्वय में तेल भंडार जारी करने का फिलहाल कोई योजना नहीं है.
G7 देशों की पहल के तहत भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से योगदान देने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस मामले में सरकार की रणनीति साफ है, 'इंडिया फर्स्ट'.