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क्या पेट्रोल-डीजल और LPG फिर होगी महंगी? होर्मुज में हमलों से मई जैसे संकट की आहट, कच्चा तेल 109 डॉलर के पार

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ताजा हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछल गई हैं. भारत को मिलने वाला कच्चा तेल 108.91 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका है, जिससे देश में फिर से मई जैसी महंगाई लौटने की आशंका है. अगर तनाव यूं ही जारी रहा तो तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं.

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देश पर फिर ईंधन के संकट का खतरा मंडराने लगा है। Credit: AI

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हुए ताजा हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने लगा है. भारत के लिए कच्चा तेल खरीदना अचानक बहुत महंगा हो गया है, जिससे देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के दाम फिर से बढ़ने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है. बुधवार को इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बंदरगाहों के पास खड़े और गुजर रहे कार्गो जहाजों को निशाना बनाकर लगातार तीन हमले किए गए. एक के बाद एक हुए इन हमलों ने वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है. सप्लाई रुकने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है. भारतीय बास्केट के लिए क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर 108.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.

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कच्चे तेल की कीमत 108.91 डॉलर के पार

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन ‘पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल’ (PPAC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 8 सितंबर को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 108.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. अगस्त में यह औसत 90.19 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. यानी महज कुछ ही दिनों के भीतर कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक का भारी उछाल दर्ज किया है.
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा हालात ठीक वैसे ही बन रहे हैं जैसे मई 2026 के दौरान देखे गए थे. उस समय भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट पर आवाजाही प्रभावित होने से कच्चा तेल 109 डॉलर के पार चला गया था, जिसके चलते तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी करनी पड़ी थी.

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भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल और करीब 60 फीसदी एलपीजी विदेशों से मंगाता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर से ऊपर जाता भाव भारत के आयात बिल पर सीधा असर डालता है. इसमें से बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है. जहाजों पर हमलों की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और ढुलाई का जोखिम बढ़ गया है.

ग्लोबल मार्केट में खलबली, सप्लाई पर संकट

इन हमलों के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया. जहाजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों और संभावित तेल आपूर्ति ठप होने के डर से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की खरीद-बिक्री में भारी अफरातफरी देखने को मिली. यदि कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही टिकी रहीं तो सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे पर भारी दबाव पड़ेगा और आम जनता पर ईंधन के महंगे दामों का सीधा बोझ पड़ना लगभग तय माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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