दिव्यांगों को जन्म से 40% पेंशन, योजनाओं के बदले नाम…, मोदी कैबिनेट ने लिए कई बड़े फैसले; जानें पूरी डिटेल

वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के साथ परिवार लाभ योजना की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी.

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कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. (Photo: ANI)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा, रेलवे कर्मचारियों और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं. साथ ही राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी है. दिव्यांग पेंशन स्कीम में बड़ा बदलाव करते हुए न्यूनतम आयु की शर्त हटाने और दिव्यांगता की पात्रता सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने का फैसला लिया गया है. वहीं, रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस देने और आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई है.

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दिव्यांग पेंशन के नियमों में बड़ा बदलाव

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट के फैसले के अनुसार, दिव्यांग पेंशन के लिए अब न्यूनतम आयु की सीमा नहीं होगी. अब दिव्यांग बच्चे को जन्म से ही इस योजना में शामिल किया जाएगा.

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दिव्यांग पेंशन में बड़े बदलाव

  • 0 से 79 वर्ष तक के दिव्यांगजनों को अब 375 रुपये प्रति माह की सहायता मिलेगी.
  • 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के दिव्यांगजनों को 625 रुपये प्रति माह मिलेंगे.
  • पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80% से घटाकर 40% की गई.
  • दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त हटाई गई. अब जन्म से ही पात्रता हो सकेगी.
  • वृद्धावस्था और विधवा पेंशन योजनाएं, परिवार लाभ योजना मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रहेंगी.
  • देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इस फैसले का फायदा मिलेगा.
  • दिव्यांग पेंशन के लिए पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़े नए दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी किए जाएंगे.
  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को सामाजिक सहायता देने के उद्देश्य से हुई थी.

तीन योजनाओं से इंदिरा गांधी का नाम हटाया गया

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 53,428 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. इस अवधि में देश के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इन योजनाओं का लाभ मिलने का अनुमान है.

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सरकार ने योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना करने का फैसला लिया है. इसके तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना और दिव्यांग पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना किया जाएगा. राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना के नाम से जाना जाएगा.

वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के साथ परिवार लाभ योजना की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी.

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रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस

कैबिनेट ने रेलवे के करीब 11.40 लाख कर्मचारियों के लिए 78 दिन के उत्पादकता आधारित बोनस को मंजूरी दी है. इस पर कुल 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च होंगे. प्रत्येक पात्र कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपये मिलेंगे. ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, तकनीशियन, पॉइंट्समैन और अन्य पात्र ग्रुप-सी कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे. बोनस का भुगतान दुर्गा पूजा और दशहरा से पहले किए जाने की परंपरा के अनुरूप होगा.

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आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य बैंक में नई पूंजी लाना और वित्तीय सेवा क्षेत्र में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना है. सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पुनर्गठित इकाई में संयुक्त रूप से 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेंगे. सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME), नए उद्यमियों और सेवा क्षेत्र के कारोबार को पूंजी जुटाने के नए अवसर मिलेंगे.

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Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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