हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

लाइसेंस नहीं बनता तो मनु भाकर कैसे जीतती ओलंपिक मेडल? मां-बाप ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सुनाई कहानी

Olympic Medalist Parents Interview: पेरिस ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर के पिता रामकिशन भाकर और मां सुमेधा भाकर का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू सामने आया है। इसमें उन्होंने जहां मनु के बारे में बात की, वहीं अपनी खुशी भी जताई।

विज्ञापन
Manu Bhaker Parents

Manu Bhaker Parents Exclusive Interview: पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय शूटर मनु भाकर ने 2 ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया। मनु भाकर ने पहले 10 मीटर पिस्टल सिंगल कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता, फिर 10 मीटर पिस्टल मिक्सड कैटेगरी में सरबजोत सिंह के साथ मिलकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। मनु भाकर के मेडल जीतने की खबर जैसे ही उसके घर पहुंची, जश्न का माहौल बन गया। ढोल नगाड़े बजे, मिठाइयां बंटी। बधाई देने वालों का तांता लगा। मनु के पिता रामकिशन भाकर और मां सुमेधा भाकर खुशी के मारे फूले नहीं समा रहे। News24 की रिपोर्टर दिव्या अग्रवाल भी मनु भाकर की खुशी बांटने उनके घर पहुंची और उनसे खास बातचीत की। आइए सुनते हैं कि मनु भाकर के पिता का एक्सक्सलूसिव इंटरव्यू…

मां ने सुनाई लाइसेंस नहीं बनने की कहानी

मां सुमेधा भाकर ने कहा कि हम मैच नहीं देखते, इसलिए आज सोचा था कि मीडिया से बाद में मिलेंगे। जब तक कोई शुभ समाचार नहीं आएगा, दरवाजा नहीं खोलेंगे। जमीन पर बैठकर ध्यान करने लगी थी। पड़ोसन ने बताया कि मनु ने मेडल जीत लिया तो जो खुशी हुई, वह उसके पिता के गले लगकर बांटी। वह एक अलग ही पल था, मनु ने कमाल कर दिया। दोनों बच्चों मनु सरबजोत के लिए प्रार्थना की। दोनों ने कड़ी मेहनत करके यहा मुकाम पाया था। उन्होंने कहा कि बहुत बच्चे जो मेहनत छोड़कर निराश हो जाते हैं। घर बैठ जाते हैं, मनु ने कई गेम खेले, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। फिर भी उसने हार नहीं मानी।

विज्ञापन

पिता से बोली कि सभी गेम खेलकर बोर हो गई हूं, कुछ नया ट्राई करती हूं। पिता बोले कि स्कूल में शूटिंग रेंज है, देख लो। वह साथ चली गई तो अनिल जाखड़ से मिली। उन्होंने मनु को डमी पिस्टल दी, जिससे उसने निशाना लगाया और वह टारगेट पर लगा। इसके बाद मनु ने शूटिंग में कदम रखा और पहला मेडल मुन का अनिल जाखड़ को समर्पित किया। फिर पिस्टल खरीदी, लेकिन काफी चक्कर काटने के बाद भी लाइसेंस नहीं बना। चरखी दादरी से झज्जर तक जाना, लेकिन फाइल नहीं बनती थी, लेकिन मीडिया वालों की मदद से वह काम हो गया था, जिसकी नतीजा आज सभी देख रहे हैं।

 

पिता ने सरकार के सामने रखी कुछ मांगें

पिता रामकिशन भाकर बोले कि मनु के मेडल जीतने की खुशी के अहसास को अहसास ही रहने देना चाहता हूं। पड़ोसन के बताने पर न्यूज देखी तो यकीन हुआ कि मनु ने दूसरा मेडल जीता है। 5 मिनट बाद ही घर के बाहर मीडिया इकट्ठा हो गया। सोसायटी के लोग ढोल नगाड़े लेकर आए गए। मनु पहले पूरे देश से बात करती है। हमारा नंबर आखिर में आता है। वह सिर्फ हालचाल जानने और खाना वगैराह पूछने के लिए ही फोन आता है। पिता ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री मोदी सबसे बड़ी मदद करते हैं कि वे खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने मनु से फोन करके बात भी की थी।

विज्ञापन

जो खिलाड़ी शुरुआत करते हैं, अगर उनको ग्रास रूट पर कैश अवार्ड और कोचिंग मिल जाए, किट मिल जाए तो वह बहुत बड़ी मदद होगी। क्योंकि नर्सरी के चक्कर में फंसकर खिलाड़ियों का समय बर्बाद होता है। चाहे किसी भी लेवल पर मेडल जीता हो, उन्हें अगर समय रहते कैश अवार्ड मिल जाए तो उन्हें काफी प्रोत्साहन मिल जाता है। शूटिंग बहुत महंगा गेम है, खर्च होने के चलते मां-बाप खर्च नहीं उठा पाते, लेकिन कैश अवार्ड मिल जाए तो मदद मिल जाएगी। हरियाणा में शूटिंग रेंज नहीं है, दिल्ली जाना पड़ता है। अगर हरियाणा में शूटिंग रेंज बन जाए तो दिल्ली जाना नहीं पड़ेगा, क्योंकि हर कोई वहां तक नहीं पहुंच पाता।

 

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola