देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए गाजियाबाद पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर खुफिया कैमरे लगा रखे थे. जिनका सीधा एक्सेस पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के पास था. यानी देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर कौन आ रहा है और कौन जा रहा है. इसकी लाइव फीड सरहद पार दुश्मन देख रहे थे. पुलिस ने इस सिलसिले में फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है. जो एक पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान की आड़ में इस नेटवर्क को चला रहा था. अब तक इस गिरोह के सरगना सुहेल समेत कुल 22 लोगों को दबोचा जा चुका है. जिससे जासूसी की एक बड़ी साजिश बेनकाब हुई है.
बिहार से फरीदाबाद तक फैला जाल
गिरफ्तार आरोपी नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है. जिसे विशेष रूप से कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद के नचौली गांव में पंचर की दुकान खुलवाई गई थी. पुलिस की जांच के अनुसार. यह दुकान सिर्फ एक दिखावा थी ताकि वह सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचकर जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे सके. पूछताछ में पता चला है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग रेलवे स्टेशनों और सैन्य ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए पाकिस्तान भेजते थे. हैरानी की बात यह है कि हर एक फोटो और वीडियो के बदले उन्हें 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे. नौशाद के साथ मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है. जिनसे पूछताछ में इस नेटवर्क की गहरी जड़ों का पता चल रहा है.
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50 सोलर कैमरों का खतरनाक प्लान
इस गिरोह की प्लानिंग कितनी खतरनाक थी. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे देश भर के संवेदनशील इलाकों में 50 सोलर कैमरे लगाने की तैयारी में थे. ये कैमरे बिजली की जरूरत के बिना धूप से चलते और लगातार डेटा पाकिस्तान भेजते रहते. पुलिस ने दिल्ली और सोनीपत में लगाए गए कुछ कैमरों को बरामद कर लिया है. जिन्हें अब फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. इन कैमरों के जरिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं को स्टेशनों की पल-पल की जानकारी मिल रही थी. जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों को इंस्टॉल करने में किन-किन लोगों ने मदद की और क्या रेलवे के अंदर का कोई कर्मचारी भी इस साजिश का हिस्सा था.
गाजियाबाद पुलिस की बड़ी कामयाबी
गाजियाबाद पुलिस की इस कार्रवाई ने देश के सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं है. बल्कि इसके पीछे किसी बड़ी आतंकी साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल पुलिस इस गिरोह के बैंक खातों और व्हाट्सऐप चैट्स को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि फंड कहां से आ रहा था. बरामद किए गए डिजिटल साक्ष्यों से कई और लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद है. इस जासूसी कांड ने यह साफ कर दिया है कि दुश्मन देश अब तकनीक का सहारा लेकर हमारे सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस की सतर्कता ने एक बड़े खतरे को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन जांच अभी जारी है.
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