परमाणु हथियार वाला पाकिस्तान अब आधिकारिक तौर पर सऊदी अरब की रक्षा से जुड़ गया है. दोनों देशों के बीच हुआ समझौता खाड़ी और दक्षिण एशिया में एक नए रणनीतिक समीकरणों को जन्म देने वाला है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रियाद में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी मौजूद थे.
इस समझौते से भारत, इजराइल, अमेरिका और चीन पर प्रभाव पड़ने वाला है. समझौते को लेकर सऊदी और पाकिस्तानी अधिकारियों के संयुक्त बयान में कहा गया है, “यह समझौता किसी भी आक्रमण के विरुद्ध संयुक्त प्रतिरोध को मजबूत करता है.” वहीं सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता किसी विशिष्ट देश के लिए नहीं है लेकिन जानकारों का कहना है कि यह संयोगवश नहीं हुआ है. कहा जा रहा है कि दोहा में हुआ हमला एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.
क्या इस्लामी या अरब नाटो की शुरुआत?
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते ने ‘सामूहिक मुस्लिम सैन्य गठबंधन’ के विचार को फिर से जन्म दे दिया है, जिसकी चर्चा सालों से होती आ रही है. इस गठबंधन को अक्सर इस्लामिक या अरब नाटो जैसे नामों से बुलाया जाता है. कई बार इस पर गंभीरता से बात हुई लेकिन यह कभी सफल नहीं हो पाया. अब इस्लामी देश के रूप में अग्रसर और इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों के संरक्षक सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता कर लिया है. इस समझौते में कहा गया है कि अगर कोई भी देश दोनों में से किसी एक पर हमला करता है तो यह दोनों देशों पर हमला माना जाएगा.
कतर के दोहा में इजराइल ने हमला किया और इस हमले में नुकसान भी हुआ. माना जा रहा है कि कतर भी सऊदी अरब से ऐसे ही समझौता या सुरक्षा गारंटी की मांग कर सकता है. नाटो का सदस्य होने के बाद भी तुर्की इस्लामी नाटो गुट की मांग करता आया है. हाल ही में जब दोहा पर मिसाइल से हमला हुआ तो अमेरिका इसे रोकने में विफल रहा. ऐसे में माना जा रहा है कि अब अमेरिका पर से लोगों का भरोसा उठ रहा है. इसे इस्लामी नाटो का सपना भी साकार होने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है.
हालांकि कई मुस्लिम देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता रही है, जिसमें सऊदी अरब और ईरान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और मिस्र के बीच की लड़ाई इस सपने के सच होने में रुकावट बन सकती है.
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते पर भारत की पैनी नजर है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत को उम्मीद है कि रियाद आपसी हितों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखेगा. सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है जो पिछले कई वर्षों में काफी गहरी हुई है. हम उम्मीद करते हैं कि इस रणनीतिक साझेदारी में आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जाएगा.
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