चाहकर भी पाकिस्तान कभी नहीं चाहेगा भारत से युद्ध, जानें 3 कमजोरियां

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल है। इस बीच पाकिस्तान ड्रोन और मिसाइल से भारत पर हमला कर रहा है। वहीं दूसरी ओर भारत भी माकूल जवाब दे रहा है। हालांकि इन सब के बीच पाकिस्तान कभी नहीं चाहेगा कि उसका भारत के साथ युद्ध हो। आइये जानते हैं ऐसा क्यों?

Pakistan Avoid War with India

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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया है। इसके बाद से ही पाकिस्तान लगातार सीजफायर और मिसाइल हमला कर रहा है। पाकिस्तान ने 50 से अधिक ड्रोन और मिसाइल अटैक किए। हालांकि भारत के मिसाइल डिफेंस सिस्टम के आगे पाकिस्तान की एक नहीं चली। वहीं दूसरी ओर भारत की ओर से पाकिस्तान के सियालकोट, पेशावर, इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, पेशावर जैसे शहरों को निशाना बनाया और भारी तबाही मचाई।

ऐसे में पाकिस्तान फिलहाल भारत को गीदड़भभकी देकर हमास शैली में रॉकेट और मिसाइल दाग रहा है। हालांकि पाकिस्तान कभी नहीं चाहेगा कि उसका भारत के साथ युद्ध हो? आइये जानते हैं पाकिस्तान की क्या कमजोरियां हैं?

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1. आर्थिक संकट

पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या उसकी आर्थिक स्थिति है। 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला यह देश फिलहाल विदेशी सहायता के सहारे जिंदा है। पाकिस्तान की कुल जीडीपी का 70 प्रतिशत तो कर्ज ही है। ऐसे में सरकार की आधी से ज्यादा आय तो ब्याज को चुकाने में ही लग जाती है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल पाकिस्तान पर 130 अरब डॅालर का कर्ज हैं।

2. सैन्य संकट

पाकिस्तान की सैन्य क्षमता भारत की तुलना में आधी से भी कम है। जबकि भारत पाकिस्तान की तुलना में 3 गुना ज्यादा ताकतवर है। भारत के पास 14 लाख सक्रिय सैनिक है जबकि पाकिस्तान के पास सिर्फ 6 लाख सक्रिय सैनिक है। इसके अलावा फाइटर जेट भारत के पास 750 से अधिक है। जबकि पाकिस्तान के पास 300 से कम फाइटर जेट है। इतना ही नहीं आर्टिलरी और तोप भी भारत के पास पाकिस्तान की तुलना में कई गुना अधिक है। वहीं भारतीय जल सेना के पास 2 स्वदेशी युद्धपोत है। जबकि पाकिस्तान के पास एक भी युद्धपोत नहीं है। इसके अलावा भारत के कई सबमरीन भी है। जोकि समुद्र में पाकिस्तान को धूल चटाने का दमखम रखती है। ऐसे में भारत जल, नभ और थल में पाकिस्तान से कई गुना आगे है।

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3. विदेशी मुद्रा भंडार

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 3.7 बिलियन डॉलर से भी कम रह गया है। जोकि कुछ सप्ताह की जरूरतों को पूरा कर सकता है। जबकि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 बिलियन डॉलर का है। जोकि विदेशी कर्ज को पूरी तरह खत्म कर सकता है। विदेशी कर्ज के मामले में तो भारत चीन और अमेरिका से भी आगे है। यानी दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम विदेशी कर्ज भारत पर है। जो कि हमारी अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता को दर्शाता है।

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