लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 17 फरवरी को ढाका में बांग्लादेश की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. विदेश मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि ओम बिरला की इस कार्यक्रम में मौजूदगी भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच गहरी और स्थायी दोस्ती को दर्शाती है. यह समारोह मंगलवार दोपहर को राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा. भारत ने तारिक रहमान के नेतृत्व में एक चुनी हुई सरकार के गठन का स्वागत किया है और दोनों देशों के बीच साझा इतिहास व आपसी सम्मान के आधार पर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.
चुनाव में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की है. 300 सीटों वाली संसद में बीएनपी ने बहुमत के लिए जरूरी 151 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए शानदार जीत दर्ज की है. यह चुनाव साल 2024 में हुए जन आंदोलनों के बाद देश का पहला चुनाव था जिसने बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव किया है. तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार हैं. इस चुनाव में लगभग 59 प्रतिशत मतदान हुआ और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरा है.
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पीएम मोदी की बधाई और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को उनकी शानदार जीत पर बधाई दी है और कहा कि यह परिणाम बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व में भरोसे को दिखाता है. बीएनपी ने पीएम मोदी के इस संदेश की सराहना करते हुए कहा कि वे भारत के साथ मिलकर शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए काम करना चाहते हैं. अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इस समारोह के लिए भारत, चीन और पाकिस्तान समेत 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है. आमंत्रित देशों की सूची में सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और नेपाल जैसे नाम भी शामिल हैं.
भविष्य के संबंधों और विकास का नया रोडमैप
बीएनपी नेता एएनएम एहसानुल हक मिलन ने भारत के साथ संबंधों पर जोर देते हुए 'सबके साथ दोस्ती और किसी के प्रति द्वेष नहीं' की नीति को दोहराया है. पार्टी ने साफ किया है कि वे समावेशी विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. भारत ने भी एक प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़े रहने का भरोसा दिलाया है. ओम बिरला की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में दोनों पड़ोसी देश आपसी हितों और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर और अधिक करीब आकर काम करेंगे. यह नई शुरुआत पूरे दक्षिण एशिया की समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.