Odisha School Books Errors: ओडिशा के स्कूल और जनशिक्षा विभाग की एक बेहद शर्मनाक लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 1 से 8वीं तक की जो नई पाठ्यपुस्तकें छपकर आई हैं, उनमें एक-दो नहीं बल्कि कुल 1,678 तथ्यात्मक, छपाई और वैचारिक गलतियां पाई गई हैं. हद तो तब हो गई जब किताबों में दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन को वैज्ञानिक की जगह “महानतम पायलट” लिख दिया गया. इस भयंकर ब्लंडर पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं.
कर्नाटक विधानसभा को बताया ओडिशा का, हम्पी बन गया कोणार्क
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार जब ये नई किताबें स्कूलों में पहुंचीं, तो इन्हें देखकर शिक्षकों और बच्चों के होश उड़ गए. किताबों में सिर्फ न्यूटन को ही पायलट नहीं बनाया गया, बल्कि भूगोल और इतिहास के साथ भी भयंकर खिलवाड़ किया गया. किताब में कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर छापी गई है और उसके नीचे ‘ओडिशा विधानसभा’ लिख दिया गया है.
इसी तरह कर्नाटक के ऐतिहासिक हम्पी मंदिर परिसर की फोटो को ‘कोणार्क सूर्य मंदिर’ बता दिया गया है. यही नहीं, ओडिशा की प्रसिद्ध नियमगिरी पहाड़ियों को भूगोल की किताब में गलत तरीके से पड़ोसी राज्य झारखंड में दिखा दिया गया है, जबकि गंजम जिले के प्रमुख शहर ब्रह्मपुर को सीधे एक नया ‘जिला’ घोषित कर दिया गया है.
8वीं क्लास की किताबों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
चौंकाने वाली बात यह है कि कुल 1,678 गलतियों में से अकेले 705 गलतियां कक्षा 8वीं की किताबों में मिली हैं. इन किताबों में गेहूं की तस्वीर को धान, कांच के गिलास को कप, तापमान को दबाव और फूड वेब (खाद्य जाल) को फूड साइकिल (खाद्य चक्र) लिख दिया गया है. इसके अलावा ‘इक्विनॉक्स’ (विषुव) को ‘इक्वेटर’ (भूमध्य रेखा) बताकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा था.
सीएम माझी का कड़ा एक्शन, 7 दिन का अल्टीमेटम
मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें स्कूल और जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड और मुख्य सचिव अनु गर्ग शामिल हुए. सीएम ने इस पूरे मामले की जांच के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी बना दी है. इस कमेटी को 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. सीएम ने साफ कहा है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों को बख्शा नहीं जाएगा. दूसरी तरफ, विभाग ने आनन-फानन में अपनी गलती मानते हुए स्कूलों को ‘शुद्धिपत्र’ जारी किया है और शिक्षकों से कहा है कि वे इन गलतियों को सुधारकर ही बच्चों को पढ़ाएं.
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