ओडिशा में अर्नब साइक्लोन से हुई भारी बारिश और बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गंजाम, कंधमाल और गजपति जिलों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है. सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ा है. अब किसान पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहे मुरासु साइक्लोन को लेकर भी चिंतित हैं. मौसम विभाग ने सोमवार से बुधवार तक दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है. साइक्लोन के मंगलवार रात आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का अनुमान है.
गंजाम के कुकुडाखंडी ब्लॉक के बैगनाबाड़ी गांव के किसान निरंजन मोहंती पिछले सप्ताह बारिश के बाद जलमग्न हुए खेत से पानी निकालकर फसल बचाने में जुटे हैं. वहीं, शेरगड़ा ब्लॉक के टकराड़ा गांव के समीर कुमार प्रधान की करीब 10 एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूबी हुई है. उन्होंने चिंता जताई कि पानी जमा रहने से धान की जड़ें सड़ सकती हैं. पत्रापुर ब्लॉक के समंतियापल्ली गांव के किसान शंकर कुमार पति का कहना है कि दोबारा बारिश हुई तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है.
90 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित होने का अनुमान
28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश में आए अर्नब साइक्लोन के बाद फसलों के नुकसान का आकलन अभी नहीं हुआ है. कृषि अधिकारियों ने करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होने का अनुमान लगाया है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश और बाढ़ से गंजाम में 3,402 हेक्टेयर से ज्यादा फसल बर्बाद हुई थी. इस खरीफ सीजन में जिले में करीब 2.16 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया था.
मुख्य जिला कृषि अधिकारी मनोरंजन राउल ने बताया कि मौसम साफ होने के बाद नुकसान का सर्वे कराया जाएगा. सरकार ने राहत कार्यों के लिए 145 अतिरिक्त कृषि अधिकारियों को तैनात किया है. इनमें 6 ब्लॉक कृषि अधिकारी, 55 कृषि पर्यवेक्षक, 30 ग्राम कृषि कार्यकर्ता और 35 बागवानी पर्यवेक्षक शामिल हैं. इस बीच, गंजाम में फसल बर्बाद होने से एक किसान के कथित तौर पर आत्महत्या करने की खबर है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रभावित परिवारों को 50 किलो चावल और 2,500 रुपये की सहायता देने के साथ फसल और संपत्ति के नुकसान पर मुआवजे का ऐलान किया है.