कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. 23 अक्टूबर को हुए मतदान के नतीजों में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी 4 सीटों पर कब्जा जमा लिया है. भारतीय जनता पार्टी ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सहयोगी दल जनता दल सेक्युलर के खाते में 1 सीट आई है. सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी इन चुनावों में अपना खाता भी नहीं खोल सकी और शून्य पर सिमट गई.
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए हुए इस चुनाव को भाजपा और जेडीएस के लिए अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था.
किसने जीती कौन सी सीट
इस चुनाव में भाजपा ने नॉर्थ-ईस्ट टीचर्स, साउथ-ईस्ट ग्रेजुएट्स, वेस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से एकतरफा जीत हासिल की है. वहीं, गठबंधन सहयोगी जेडीएस ने भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में जीत दर्ज कर गठबंधन की ताकत को मजबूती दी.
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने दोबारा चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना को 908 मतों के अंतर से हराया. रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट हासिल हुए.
वहीं, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य शशिल जी. नामोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को हरा दिया. इस निर्वाचन क्षेत्र से यह उनकी पांचवीं जीत है. इस क्षेत्र में कलबुर्गी और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के पड़ोसी जिले आते हैं. कलबुर्गी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र है.
वहीं, दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार केएम सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मठ को हरा दिया. पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य एसवी संकनूर ने जीत हासिल की है.
क्या बोली भाजपा?
शानदार जीत के बाद एनडीए खेमे में भारी उत्साह है. नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अशोक गौड़ा ने एनडीटीवी से कहा, ‘यह एनडीए की बड़ी सफलता है और इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे सभी झूठे नैरेटिव बेनकाब हो गए हैं. कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है. जनता ने साफ रूप से कह दिया है कि वे कांग्रेस सरकार से तंग आ चुके हैं.’
साथ ही उन्होंने कहा, ‘यह परिणाम संकेत है कि आने वाले बीबीएमपी चुनावों में क्या होने वाला है. कांग्रेस को इस नतीजे से सीख लेनी चाहिए कि जनता उनके साथ नहीं है. वे केवल मनगढ़ंत और सच्चाई से कोसों दूर कहानियां गढ़ते हैं.’
(पीटीआई के इनपुट्स के साथ)