जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में चल रही अंदरूनी नाराजगी फिलहाल कम होती दिख रही है. पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को श्रीनगर के गुपकर स्थित आवास पर नाराज विधायकों के साथ करीब दो घंटे बैठक की. इसमें विधायकों की शिकायतें सुनी गईं और उन्हें भरोसा दिया गया कि उनकी मांगों पर धीरे-धीरे कदम उठाए जाएंगे. हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने मंत्रियों और सलाहकार की नियुक्ति में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
कैबिनेट में बदलाव पर नहीं बनी सहमति
हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद कई विधायक नाराज थे. उनकी मांग थी कि मंत्रिमंडल में बदलाव हो और सरकार के फैसलों में विधायकों की भागीदारी बढ़ाई जाए. बैठक में तुरंत कैबिनेट फेरबदल या किसी मंत्री को हटाने पर सहमति नहीं बनी. नेतृत्व ने बदलाव पर विचार के लिए एक साल तक का समय मांगा. मंत्रियों के विभागों की छह महीने से एक साल के भीतर समीक्षा का प्रस्ताव भी रखा गया. विधायकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए हर मंत्री के साथ चार विधायकों का विभागीय सलाहकार समूह बनाने की बात हुई. इससे विधायक अपने क्षेत्र की समस्याएं सीधे मंत्रियों तक पहुंचा सकेंगे. जम्मू इलाके से मुख्यमंत्री का एक अतिरिक्त सलाहकार नियुक्त करने पर भी चर्चा हुई, लेकिन फैसला नहीं हुआ.
बैठक में इस्तीफे तक की बात आई
बैठक के दौरान मंत्रियों के चयन और विभागों के बंटवारे को लेकर उमर अब्दुल्ला नाराज बताए गए. एक विधायक के मुताबिक, उमर ने दबाव में काम करने के बजाय इस्तीफा देने और किसी दूसरे विधायक को मुख्यमंत्री बनाने की बात भी कही. हालांकि, विधायकों ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी नेतृत्व से नहीं, बल्कि सरकार में प्रतिनिधित्व और तालमेल की कमी से जुड़ी है. फारूक अब्दुल्ला ने विधायकों की शिकायतों को जायज बताया और पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज किया. वरिष्ठ विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने भी कहा कि विधायकों का अलग गुट बनाने का कोई इरादा नहीं था.
कई मांगों पर चर्चा
इससे पहले विधायकों ने लोलाब के विधायक कैसर जमशीद लोन के घर बैठक की थी और फारूक व उमर अब्दुल्ला को कई मांगों पर चर्चा का ज्ञापन सौंपा था. इसमें कैबिनेट में बदलाव, सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने, मंत्रियों और विधायकों के बीच बेहतर तालमेल, सरकार की जवाबदेही और चुनावी वादों को समय पर पूरा करने की मांग शामिल थी. जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा और विशेष संवैधानिक स्थिति बहाल करना भी उनकी मांगों में था. जम्मू के कुछ विधायकों ने उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के पास मौजूद सड़क एवं भवन विभाग को लेकर भी आपत्ति जताई थी. हालांकि, बैठक के बाद न उपमुख्यमंत्री और न ही मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने का कोई ऐलान हुआ. हालिया कैबिनेट विस्तार में चार नए मंत्री शामिल किए गए थे, लेकिन कई वरिष्ठ विधायक इससे खुश नहीं थे. फिलहाल नेतृत्व ने उन्हें भरोसा देकर परेशानी टालने की कोशिश की है. अब देखना होगा कि प्रस्तावित सलाहकार समूह और अन्य कदमों से असल में कितना बदलाव आता है.