जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर भड़की बगावत थमने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार को श्रीनगर में करीब 10 से 15 असंतुष्ट विधायकों ने बंद कमरे में तीसरी अहम बैठक. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बैठक में अपनी आगामी रणनीति पर मंथन किया. 27 अक्टूबर को किए गए इस कैबिनेट फेरबदल का मकसद सरकार को मजबूती देना था, लेकिन इसने पार्टी के भीतर गुटबाजी और बगावत को हवा दे दी है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट फेरबदल के बाद असंतुष्ट विधायकों की यह तीसरी बैठक है.
यह मीटिंग उस दिन हुई है, जब छह बार के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल की मांगों पर विचार करने के लिए 4 नवंबर की समयसीमा खत्म हो गई.
मुबारक गुल के तीखे तेवर
डेडलाइन समाप्त होने के बाद मुबारक गुल ने अपने सरकारी आवास पर समर्थकों के साथ अहम बैठक की. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सीधे तौर पर कुछ कहने से परहेज किया, लेकिन अपने तेवर साफ कर दिए. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने साथियों की उन भावनाओं और जज्बातों की कद्र करता हूं, जो करीब 75 साल पुराने हैं. सही वक्त पर चीजें सामने आएंगी. फिलहाल मुझे कुछ नहीं कहना, लेकिन मैं एक फाइटर हूं और लड़ता रहूंगा.’
आगा रूहुल्लाह के इस्तीफे ने बढ़ाई आग
एक दिन पहले ही श्रीनगर लोकसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे का ऐलान कर दिया. उन्होंने फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की बहाली की लड़ाई छोड़ दी है. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वह राज्य में एक नया राजनीतिक विकल्प या मोर्चा खड़ा कर सकते हैं.
हाईकमान की ‘फूट डालो’ रणनीति फेल
सूत्रों के मुताबिक, असंतुष्ट खेमे में लगातार बढ़ती लामबंदी को तोड़ने के लिए एनसी नेतृत्व ने बागी विधायकों से अलग-अलग संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन विधायकों ने अपनी एकजुटता बरकरार रखी है. अब इस संकट को सुलझाने के लिए डॉ. फारूक अब्दुल्ला सीधे मैदान में उतरेंगे. बागी विधायकों का एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात करेगा.
क्या खतरे में है सरकार?
90 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में यह बगावत उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए गंभीर संकट खड़ी कर सकती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं. उनकी सरकार को कांग्रेस के 6 विधायक, छोटे दल और कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है. ऐसे में अगर बागी विधायकों ने अपने तेवर नहीं बदले तो उमर सरकार के बहुमत को सीधे तौर पर खतरे में डाल देगा.