पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिए गए अपने विवादित बयान पर अफसोस जताया. उन्होंने कहा कि उनका वीडियो असली है, लेकिन जल्दबाजी में एक शब्द छूट जाने से उनके बयान का अर्थ बदल गया. श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वह कई पत्रकारों को अलग-अलग बाइट दे रही थीं. इसी दौरान एक बयान में उन्होंने कहना चाहा था कि आतंकवाद होता है और यह हिंसा का ‘बहाना बनता है’, लेकिन जल्दबाजी में उनके मुंह से केवल बनता है निकला और ‘बहाना’ शब्द छूट गया.
उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि उन्होंने पूरा वाक्य बोल दिया है, लेकिन इस चूक से उनके बयान का मतलब बदल गया. महबूबा मुफ्ती ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो फर्जी या एडिटेड नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं कहूंगी कि वीडियो फर्जी है, वह असली है.’ हालांकि, उनका कहना था कि अधूरे वाक्य की वजह से उनके इरादे को गलत तरीके से पेश किया गया. गौरतलब है कि एक दिन पहले उनकी पार्टी के एक विधायक ने वीडियो को एडिटेड बताया था.
महबूबा मुफ्ती के इस बयान के बाद घाटी में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था. उमर अब्दुल्ला समेत नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने आरोप लगाया था कि उनके बयान से यह संदेश गया कि घाटी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को उचित ठहराया जा रहा है. विपक्षी नेताओं ने उनसे सार्वजनिक माफी की मांग भी की थी.
अपने स्पष्टीकरण के दौरान महबूबा मुफ्ती ने आलोचकों पर भी पलटवार किया. उन्होंने विशेष रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस और उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके राजनीतिक विरोधियों ने सत्ता में रहते हुए ‘महल और अनगिनत संपत्तियां’ बनाई हैं, जबकि उन्होंने हमेशा जनता के साथ खड़े होकर राजनीति की है. उन्होंने दावा किया कि उनके पास न तो कोई घर है और न ही कोई कार.