पंजाब पुलिस ने मध्य प्रदेश से भारतीय सेना के पूर्व कैप्टन संदीप तोमर को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस बीते चार सालों से उसकी तलाश कर रही थी. वह अपनी पत्नी की हत्या के मामले में फरार चल रहा था. बता दें कि तोमर की गिरफ्तारी एक LPG सिलेंडर बुकिंग की वजह से उनकी गिरफ्तारी हो पाई.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा अपराध के लिए उसकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखे जाने के बाद से ही तोमर फरार था. पुलिस ने उसके नाम पर बुक किए गए एक LPG सिलेंडर से जुड़े भुगतानों को ट्रैक करके उसे पांढुर्ना जिले में खोज निकाला.
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यह जांच तब शुरू हुई, जब तोमर के ससुर ने उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए अदालत में एक अर्जी दायर की. फरार अधिकारी का पता लगाने के लिए, पुलिस अधीक्षक आसवंत सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया.
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SIT ने नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NAT-GRID) के साथ मिलकर काम किया और तोमर का असली PAN कार्ड ढूंढ निकाला. इसका इस्तेमाल उनके बैंक खातों की पहचान करने के लिए किया गया. एक प्राइवेट बैंक ने तोमर के PAN से जुड़ा एक खाता होने की जानकारी दी.
बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण से पता चला कि एक निजी कंपनी द्वारा हर महीने सैलरी जमा की जाती थी और खाते से एक मोबाइल नंबर जुड़ा हुआ था, जिससे यह साबित हुआ कि तोमर पंधुरना में मौजूद था. हालांकि, उसकी सटीक जगह अभी भी साफ नहीं थी.
बैंक स्टेटमेंट की और जांच करने पर भारत गैस के एक LPG सिलेंडर के लिए किए गए लेन-देन का पता चला. गैस एजेंसी से संपर्क करने पर पुलिस उस किराए के मकान तक पहुंच गई जहां सिलेंडर पहुंचाया गया था, और इसी दौरान तोमर को गिरफ्तार किया गया.
उसे मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से वापस पंजाब लाया गया. बताया जाता है कि पकड़े जाने से बचने के लिए वह देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपा रहा.
तोमर, जो 12 बिहार रेजिमेंट में था और अबोहर छावनी में तैनात था, को 2014 में अपनी पत्नी श्वेता का गला घोंटने और इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था. उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, सेना से बर्खास्त कर दिया गया और फिरोजपुर जेल में डाल दिया गया. 2019 में जमानत मिलने के बाद, 2022 में हाई कोर्ट द्वारा उसकी सजा को बरकरार रखने के फैसले के बाद वह फरार हो गया था.