Lok Sabha Election 2024 : केंद्र में नई सरकार चुनने के लिए लोकसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं बचे हैं। इस बीच मतदाताओं से जुड़ी एक रोचक जानकारी सामने आई है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान महिला वोटर्स की संख्या 43.1 करोड़ थी। आगामी चुनाव के लिए इस आंकड़े में 9.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पुरुष मतदाताओं की संख्या 46.4 करोड़ थी जिसमें 6.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके अलावा कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष वोटर्स से ज्यादा है।
साल 2019 में मतदाताओं की कुल संख्या 89.6 करोड़ थी जो आगामी चुनाव के लिए अब 96.8 करोड़ हो गई है। 2019 में 46.5 करोड़ पुरुष मतदाता थे और 43.1 करोड़ महिला मतदाता थीं। 2024 के चुनाव के लिए पुरुष वोटर्स की संख्या बढ़कर 49.5 करोड़ और महिला मतदाताओं की संख्या 47.1 करोड़ हो गई है। तुलनात्मक रूप से महिला मतदाताओं की संख्या में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में थर्ड जेंडर के 39,683 वोटर्स थे, यह संख्या अब 48,044 हो गई है।
कितने लोग डालेंगे पहली बार वोट
ताजा मतदाता लिस्ट में 18 से 19 साल आयु वर्ग के करीब 1.85 करोड़ मतदाताओं को जोड़ा गया है जो पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। 2019 की तुलना में इस संख्या में 22.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही 17 वर्ष से अधिक लेकिन 18 से कम आयु के युवाओं की ओर से एनरोलमेंट के लिए 10.6 लाख एडवांस एप्लीकेशन भी मिले हैं। 20 से 29 साल आयु वर्ग में आने वाले मतदाताओं की संख्या 19.7 करोड़ से ज्यादा है। वहीं, देश में वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं की संख्या लगभग 1.86 करोड़ है।
कहां पर महिला मतदाता हैं ज्यादा
निर्वाचन आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल समेत करीब दर्जन भर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष वोटर्स से ज्यादा है। आयोग के मुताबिक साल 2023 के मुकाबले इस साल लिंग अनुपात में भी बढ़ोतरी हुई है। 2023 में यह आंकड़ा 940 था जो 2024 के लिए 948 हो गया है। पहली बार वोट डालने वालों में करीब 1.41 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। यह नए पुरुष मतदाताओं के मुकाबले यह संख्या 15 प्रतिशत से ज्यादा है।
ये भी पढ़ें:400 सीटें जीतने को क्या दांव खेलेगी भाजपा?ये भी पढ़ें:पाकिस्तान में कौन बनाने जा रहा है सरकार?ये भी पढ़ें:क्या अकेले पड़ गए मराठा छत्रप शरद पवार?