Laal Hit Janta Party: ‘लाल हित जनता पार्टी’ नाम का एक ग्रुप सामने आया है, जिसका मकसद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का विरोध है. आजकल सीजेपी चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है और उनके इस्तीफे की मांग कर रही है. एलएचजेपी ने 18 अक्टूबर को नई दिल्ली के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के मालवीय स्मृति भवन में सदस्यों की एक बैठक आयोजित की. इसके प्रतिनिधियों ने संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा करने, लोकतंत्र को मजबूत करने और सार्वजनिक प्रदर्शनों में जिम्मेदार तरीके से भागीदारी सुनिश्चित करने का ऐलान किया.
इस ग्रुप का मकसद क्या है?
ग्रुप के संयोजक अयान भटनागर ने फिल्म निर्माता ऋचा गुप्ता, पवन नागपाल और अतुल गंगवार के साथ मिलकर सभा को संबोधित किया. ग्रुप ने युवाओं, खासकर Gen Z के सदस्यों से आग्रह किया कि वो शांतिपूर्ण प्रदर्शनों, तथ्यों पर आधारित बातचीत और कानूनी तरीकों के जरिए अपनी राय रखें.
इनका मोटो है, ‘राष्ट्र सर्वोपरि, संविधान का सम्मान, लोकतंत्र हमारी पहचान.’ इसका नाम एक कीड़े मारने वाले ब्रांड की ओर एक सटीरिकल इशारा लगता है, जो CJP के नाम रखने के तरीके से मिलता-जुलता है. भटनागर ने कहा कि इस संगठन का गठन चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि CJP के प्रदर्शनों का विरोध करने के लिए किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रोटेस्ट से संवैधानिक संस्थाओं में लोगों का भरोसा कम होता है और कमर्शियल एक्टिविटीज में रुकावट आती है.
बिजनेस का नुकसान और राजनीतिक आरोप
इस ग्रुप के स्पीकर्स ने दावा किया कि दिल्ली के कमर्शियल इलाकों में हो रहे प्रदर्शनों से व्यापारियों पर बुरा असर पड़ा है, खासकर त्योहारों के दौरान खरीदारी के सीजन में. पत्रकार पवन नागपाल ने आरोप लगाया कि इससे 3000 करोड़ रुपये का व्यावसायिक नुकसान हुआ है और ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है.
भटनागर ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की भी आलोचना की. उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ इसलिए कि कोई ग्रुप बड़ी भीड़ इकट्ठा कर लेता है, संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शनों के जरिए उस ‘सत्ता परिवर्तन’ को हासिल किया जा सकता है, जिसकी बात वकील प्रशांत भूषण ने की थी?
शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक भागीदारी की अपील
एलएचजेपी ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ गलत सलूक किया है. उन्होंने कानून लागू करने वाली एजेंसियों का अधिक सम्मान करने की अपील की. इसके प्रतिनिधियों ने नागरिकों से गुजारिश की कि वो सिर्फ सोशल मीडिया अभियानों तक सीमित न रहें, बल्कि संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रूप से हिस्सा लें.