फिल्म शुरू होने में 22 मिनट की देरी पड़ी भारी, थिएटर को देना होगा ₹75 हजार; जानें पूरा मामला

हैदराबाद में कुबेरा फिल्म शुरू होने में 22 मिनट की देरी पर उपभोक्ता आयोग ने थिएटर को ₹75,000 देने का आदेश दिया. जानें पूरा मामला.

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कुबेरा फिल्म के दौरान थिएटर में विज्ञापनों से देरी का मामला. (Image- AI Generated)

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फिल्म देखने के लिए टिकट खरीदे, समय पर सीट पर पहुंच गए, लेकिन करीब 22 मिनट तक फिल्म की जगह विज्ञापन और ट्रेलर चलते रहे. इस देरी को लेकर हैदराबाद के एक उपभोक्ता आयोग ने थिएटर को जिम्मेदार माना है. आयोग ने सिनेप्लेक्स को दर्शक को कुल ₹75,000 देने का आदेश दिया है. यह मामला 20 जून 2025 का है. एक 33 वर्षीय व्यक्ति ने धनुष और नागार्जुन की फिल्म ‘कुबेरा’ देखने के लिए दो टिकट बुक किए थे. शो का समय रात 10:35 बजे था. शिकायतकर्ता ने The Indian Express को बताया कि वह और उसका दोस्त करीब 10:30 बजे तक अपनी सीट पर बैठ चुके थे. हालांकि, शिकायत के मुताबिक, इसके बाद भी थिएटर में विज्ञापन और फिल्म के ट्रेलर चलते रहे. ये करीब 10:52 बजे तक जारी रहे. यानी फिल्म शुरू होने में लगभग 22 मिनट की देरी हुई.

देर से फिल्म शुरू होने पर क्या हुआ?

शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि फिल्म शुरू होने में हुई देरी की वजह से वह रात करीब 3 बजे घर पहुंचा, जबकि उसके अनुसार उसे करीब एक घंटे पहले घर पहुंच जाना चाहिए था. उसने इस देरी को सेवा में कमी (Deficiency in Service) बताते हुए शिकायत दर्ज कराई. इस मामले में हैदराबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Hyderabad District Consumer Disputes Redressal Commission) ने 11 सितंबर 2026 को अपना आखिरी फैसला दिया. यह फैसला शिकायत दर्ज होने के एक साल से ज्यादा समय के बाद आया. आयोग ने शिकायतकर्ता की बात से सहमति जताई और थिएटर के इस व्यवहार को अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना.

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थिएटर पर क्यों लगा जुर्माना?

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने पब्लिक सर्विस अवेयरनेस फिल्मों की स्क्रीनिंग से जुड़े सरकारी दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया. इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, मंजूर किए गए ऐसे पब्लिक सर्विस कंटेंट का समय ज्यादा से ज्यादा दो मिनट तक होना चाहिए. हालांकि, आयोग का फैसला सिर्फ इस बात पर आधारित नहीं था कि फिल्म शुरू होने से पहले सिनेमाघरों में विज्ञापन नहीं चलाए जा सकते. आयोग ने खास तौर पर थिएटर को कमर्शियल विज्ञापनों और प्रमोशनल कंटेंट की वजह से हुई देरी के लिए जिम्मेदार माना. आयोग के मुताबिक, ये कंटेंट व्यावसायिक फायदे के लिए दिखाए जा रहे थे और इनकी वजह से फिल्म शुरू होने में देरी हुई.

थिएटर ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान थिएटर कंपनी ने अपनी तरफ से कहा कि विज्ञापन, पब्लिक सर्विस अनाउंसमेंट (PSA) और फिल्म के ट्रेलर उसके बिजनेस ऑपरेशन का हिस्सा हैं. थिएटर ने यह भी कहा कि पब्लिक सर्विस से जुड़ा कंटेंट सिर्फ व्यावसायिक उद्देश्य के लिए नहीं होता, बल्कि इसका जनहित का उद्देश्य भी होता है. हालांकि, इस मामले को देखते हुए आयोग ने थिएटर की इस दलील को स्वीकार नहीं किया.

₹75,000 की रकम कैसे बांटी जाएगी?

आयोग ने थिएटर को ₹75,000 देने का आदेश दिया है, लेकिन यह पूरी रकम शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर नहीं मिलेगी. इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है:

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  • ₹20,000 शिकायतकर्ता को हुई परेशानी के मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे.
  • ₹5,000 मुकदमे से जुड़े खर्च यानी लिटिगेशन कॉस्ट के तौर पर दिए जाएंगे.
  • ₹50,000 प्यूनिटिव डैमेज यानी सजा के हर्जाने के तौर पर District Consumer Welfare Fund में जमा किए जाएंगे.

आयोग ने ₹50,000 की दंड राशि इसलिए तय की है ताकि थिएटर आगे इस तरह की गलती को दोबारा न दोहराए.

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