'CEC ज्ञानेश कुमार सरकार की कठपुतली', CWC की बैठक में बरसे खरगे, वोटर लिस्ट को लेकर रखीं 5 बड़ी मांगें

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की. खरगे ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को ‘वोटों की नोटबंदी’ करार देते हुए चुनावी पारदर्शिता के लिए 5 मुख्य मांगें सामने रखीं. वहीं चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज किया.

CWC Meeting, mallikarjun kharge

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की. CREDIT: X ( @kharge ) / ANI

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कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है. खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘कठपुतली’ करार दिया और उनके इस्तीफे की मांग की. खरगे ने आरोप लगाया कि देश में मतदाता सूची से नाम काटे जा रहे हैं, जो एक तरह से ‘वोटों की नोटबंदी’ जैसा है. बैठक को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और जनता का भरोसा कायम रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ हार-जीत की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की है.

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खरगे बोले- ‘रक्षक ही बन गया भक्षक’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत BJP और सरकार के इशारे पर मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं. उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की तुलना नोटबंदी से करते हुए इसे ‘वोटबंदी’ करार दिया. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट की रक्षा होना और हर वोट निष्पक्ष रूप से गिना जाना बुनियादी सिद्धांत है. उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो संस्था वोट की रक्षा के लिए बनी थी, वह आज वोट लूटने वालों जैसी भूमिका में दिख रही है ‘रक्षक ही भक्षक बन गया है.’

युवाओं के मताधिकार पर संकट का आरोप

खरगे ने नए वोटरों के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को पूरी तरह अवैध बताया. उन्होंने याद दिलाया कि 1988 में राजीव गांधी सरकार ने युवाओं को सशक्त बनाने के लिए वोट देने की उम्र 21 से घटाकर 18 साल की थी. वहीं, मौजूदा सरकार युवाओं से सवाल पूछने का अधिकार छीनना चाहती है. खड़गे ने तंज कसा, “इन्होंने नौकरियां तो दी नहीं, अब वोट डालने का हक भी नहीं देना चाहते.”

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने रखीं ये 5 मांगें

  • वोटर लिस्ट में बदलाव का डेटा सार्वजनिक हो: मतदाता सूची में हुए हर बड़े बदलाव और संशोधन का पूरा ब्योरा बिना छिपाए जनता के सामने रखा जाए.
  • कटे नामों की जानकारी और अपील का मौका: जिन मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जाए और अपील करने का उचित समय व मौका मिले.
  • राजनीतिक दलों को आसान डेटा मिले: सभी मान्यता प्राप्त दलों को वोटर लिस्ट और उससे जुड़े जरूरी आंकड़े समय पर और सरल फॉर्मेट में उपलब्ध कराए जाएं.
  • गड़बड़ी की समयबद्ध और स्वतंत्र जांच: वोटर लिस्ट में जहां भी गंभीर विसंगतियां या फर्जीवाड़े की शिकायत मिले, वहां तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कराई जाए.
  • चुनावी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता: चुनाव से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसलों और आंकड़ों को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी स्तर पर संदेह की गुंजाइश न रहे.

राहुल गांधी के उठाए मुद्दों की तारीफ

खरगे ने महादेवपुरा, आलंद के साथ-साथ हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावी क्षेत्रों में डुप्लीकेट वोटरों और संदिग्ध पतों को लेकर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों की सराहना की. उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग समय रहते इन शिकायतों पर गौर करता, तो आज उसकी विश्वसनीयता कटघरे में न होती.

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सड़क से संसद तक संघर्ष का ऐलान

कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की है. उन्होंने कहा, “सरकारें और चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन लोकतंत्र और संविधान हमेशा रहने चाहिए.” वोट गरीबों और वंचितों का सबसे बड़ा हथियार है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर छिनने नहीं देगी और इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रहेगा. वहीं, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है.

चुनाव आयोग का रुख

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद और किसी भी तरह के दबाव के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट में स्पेशल रिविजन (SIR) की पूरी प्रक्रिया तय कानूनी नियमों और सर्वसम्मति के तहत ही पूरी की जा रही है. किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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