Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए जो मामला सामने आया है, वह आपका ध्यान खींच लेगा। ये केस भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच के समक्ष आया है। केरल की एक ऐसी महिला ने याचिका दाखिल की है, जो मुस्लिम फैमिली में पैदा हुई हैं, लेकिन उनकी आस्था इस्लाम में नहीं है। उन्होंने प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी मांगी है। शरिया के मुताबिक नहीं, बल्कि हिस्सेदारी भारतीय उत्तराधिकार कानून के तहत मांगी गई है। महिला की ओर से 29 अप्रैल को शीर्ष न्यायालय के सामने गुहार लगाई गई थी। जिस पर विचार के लिए अब न्यायालय सहमत हो गया है।
यह भी पढ़ें: 14 साल की रेप पीड़िता का नहीं होगा गर्भपात; सुप्रीम कोर्ट ने क्यों वापस लिया अपना आदेश?
महिला ने बताया कि उनके पुरखों ने इस्लाम कबूल किया था। उस हिसाब से देखें, तो वे मुस्लिम फैमिली में पैदा हुई हैं। लेकिन उनके पिता की पीढ़ी से ही परिवार इस्लाम धर्म में आस्था नहीं रखता है। महिला की याचिका पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सुनवाई की है। खंडपीठ ने महिला के वकीलों की दलीलें भी सुनीं और विचार किया। इसके बाद कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमण को एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया। न्यायमित्र को कोर्ट ने कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं से अवगत करवाने को कहा है।
एक संघ से जुड़ी हुई हैं याचिकाकर्ता महिला
महिला का नाम सफिया है। वे एक ऐसे संघ की महासचिव हैं, जो केरल में पूर्व मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करता है। ये संघ उन लोगों के लिए है, जिनका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ है, लेकिन वे इस्लाम में आस्था नहीं रखते। सफिया की ओर से दाखिल पीआईएल में बताया गया है कि वे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले अधिकार का प्रयोग करना चाहती हैं। यह अनुच्छेद धर्म के मौलिक अधिकार के उपयोग की छूट देता है।
महिला ने कहा कि इस अनुच्छेद के तहत धर्म में आस्था रखो या न रखो, ये आजादी है। पिता की भी इस्लाम में आस्था नहीं है। वे भी शरीयत के हिसाब से संपत्ति का बंटवारा नहीं चाहते। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार मुस्लिम परिवार में जन्मे शख्स को ही पैतृक संपत्ति में हिस्सा लेने का हक है। धर्मनिरपेक्ष कानून का लाभ नहीं मिल सकता। जबकि सफिया चाह रही हैं कि उनको भारतीय उत्तराधिकार कानून के तहत प्रॉपर्टी में हक मिले।
यह भी पढ़ें: बच्चों की एडल्ट फिल्में देखना अपराध है या नहीं? पढ़ें सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
महिला ने बताया कि उनका भाई मानसिक बीमारी डाउन सिंड्रोम का शिकार है। उनकी एक बेटी है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से उनको एक तिहाई और भाई को दो तिहाई हिस्सा मिलेगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वे इसकी घोषणा कैसे कर सकते हैं? हक आस्तिक और नास्तिक होने से नहीं मिलते। वे तो जहां जन्म हुआ है, उसी हिसाब से मिलते हैं। इसलिए आप पर मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू होगा। मामले की अगली सुनवाई गर्मियों की छुट्टी के बाद यानी जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी।
संबंधित खबरें
'जनता डरने वाली नहीं...', मार्च के बाद राहुल गांधी ने जारी किया Video संदेश
2 hrs agoबैटमैन मास्क की क्या है कहानी? राहुल गांधी ने खरगे को भी पहनाया
2 hrs ago6 राज्यों में नए गवर्नर्स का ऐलान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की नियुक्ति
3 hrs agoमहंगे इलाज के खिलाफ केंद्र का एक्शन! अब अस्पताल नहीं ऐंठ पाएंगे भारी फीस
3 hrs agoदिल्ली-NCR में छाए रहेंगे बादल, जानें आपके राज्य में कल कैसा रहेगा मौसम
4 hrs agoCJI सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग पर भड़का सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन
4 hrs agoEC की फाइलें, एजेंडा और मीटिंग मिनट्स…, SC से विपक्ष की क्या है मांगें?
5 hrs agoदिल्ली में नए प्रदर्शन स्थल पर कैसे पहुंचा जा सकता है? जानिए पूरी डिटेल
6 hrs agoउम्र, एजुकेशन..., नेहा बोरा के बारे में Google पर क्या सर्च कर रहे लोग?
6 hrs ago'अराजकता फैला रहे हैं नेता प्रतिपक्ष', INDIA गठबंधन मार्च पर भड़की BJP
6 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines