कश्मीर में पतझड़ के मौसम को रंगीन बनाने के लिए श्रीनगर के चश्मा शाही स्थित नेहरू मेमोरियल बॉटनिकल गार्डन में ‘बाग-ए-गुल-ए-दाऊद’ को फिर से खोला गया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बगीचे का उद्घाटन किया. यहां इस बार 1.2 करोड़ से ज्यादा गुलदाउदी के फूल खिलने की उम्मीद है.
जबरवान पहाड़ियों की निचले हिस्से में और डल झील के पास बने इस बगीचे का इस साल और बड़ा किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, इसे एशिया का सबसे बड़ा गुलदाउदी बगीचा बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. फूलों और बगीचों की देखभाल करने वाले सरकारी विभाग ने करीब 120 कनाल जमीन पर गुलदाउदी के 3.5 लाख पौधे लगाए हैं. ये पौधे यहीं के इलाके में ही तैयार किए गए हैं. इस बार बगीचे में गुलदाउदी की 72 किस्में देखने को मिलेंगी. पिछले साल के मुकाबले इनकी संख्या लगभग दोगुनी है. यहां पीले, लाल, गुलाबी, बैंगनी और सफेद रंग के फूलों के साथ हल्के रंगों वाले फूल भी खिले हैं.
आसपास लगे चिनार, मेपल और जिन्कगो के पेड़ों की बदलती पत्तियां बगीचे की खूबसूरती को और बढ़ा रही हैं. अधिकारियों ने बताया कि ट्यूलिप के फूलों के लिए बाहर से बल्ब मंगाने पड़ते हैं, लेकिन गुलदाउदी के पौधे कश्मीर में ही तैयार किए गए हैं. ये फूल हल्की बर्फबारी भी सह सकते हैं. उम्मीद है कि दिसंबर की शुरुआत तक बगीचे में फूल खिले रहेंगे. इससे पर्यटकों को इन्हें देखने के लिए ज्यादा समय मिलेगा.
ट्यूलिप के बाद अब गुलदाउदी से बढ़ेगा पर्यटन
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लगातार दूसरे साल इस बगीचे का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि इसका मकसद कश्मीर में पर्यटन के मौसम को बढ़ाना है. आमतौर पर वसंत के मौसम में ट्यूलिप गार्डन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है. अब गुलदाउदी का यह बगीचा पतझड़ में भी पर्यटकों को कश्मीर आने का एक नया कारण देगा. मुख्यमंत्री ने देशभर के लोगों के साथ श्रीनगर और आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों से भी बगीचे में आने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोग यहां फूलों की खूबसूरती का आनंद लें, तस्वीरें खींचें और अच्छी यादें लेकर लौटें. फ्लोरीकल्चर विभाग की निदेशक मथूरा मासूम ने इस बगीचे को विभाग का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ बताया. उन्होंने कहा कि विभाग चाहता है कि गुलदाउदी का बगीचा भी कश्मीर के ट्यूलिप गार्डन जितना लोकप्रिय बने. उनके मुताबिक, वसंत का मौसम ट्यूलिप के नाम होगा और पतझड़ गुलदाउदी के नाम.
पर्यटकों के लिए बढ़ाई गई सुविधाएं
बगीचे में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए रास्ते चौड़े किए गए हैं. इसके अलावा सजावटी खुले स्थान, फव्वारे, लकड़ी के मंडप और सेल्फी पॉइंट भी बनाए गए हैं. अधिकारियों को उम्मीद है कि फूलों की नई किस्मों और बेहतर सुविधाओं के कारण यहां देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के साथ स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचेंगे. इस पहल से कश्मीर में पतझड़ का मौसम भी पर्यटन के लिए खास बन सकेगा.