देश के मशहूर कृषि वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुब्बन्ना अय्यप्पन (70) का शव मिला है, जो पिछले 6 दिन से लापता थे। उनका शव श्रीरंगपटना में साईं आश्रम के पास कावेरी नदी में मिला। वे मैसूर के विश्वेश्वर नगर औद्योगिक क्षेत्र में अपनी पत्नी के साथ रह रहे थे, लेकिन 7 मई को अपने घर से अचानक लापता हो गए थे। उनके परिवार में पत्नी और 2 बेटियां हैं।
श्रीरंगपटना पुलिस ने मामला दर्ज करके मौत होने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस को शनिवार शाम को नदी में एक अज्ञात शव देखे जाने की सूचना मिली थी। जब पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नदी से निकाला तो वैज्ञानिक की पहचान हो गई। अय्यप्पन का स्कूटर नदी किनारे मिला। पहली जांच में पुलिस मानकर चल रही है कि उन्होंने आत्महत्या की है।
सुबन्ना अय्यपन कौन थे?
सुबन्ना अय्यपन कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनका जन्म 10 दिसंबर 1955 को चामराजनगर जिले के यालांदुर में हुआ था। 1975 में अय्यपन ने मतस्य विज्ञान (फिशरीज साइंस) में ग्रेजुएशन की। 1977 में इसी सब्जेक्ट से मास्टर्स की। 1988 में बेंगलुरू की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से Phd की। अपने जीवन काल में कई पदों पर रहकर देश सेवा की। देश में ब्लू रेवोल्यूशन (नीली क्रांति- मतस्य पालन) का श्रेय अय्यपन को ही जाता है। साल 2022 में उन्हें देश के चौथे सबसे बड़े सम्मान पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
अय्यपन ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन (CIFE) मुंबई के निदेशक की भूमिका निभाई। अय्यपन भुवनेश्वर में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (CIFA) के निदेशक भी रहे। अय्यपन हैदराबाद के संस्थापक मुख्य कार्यकारी थे। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के अधिकारी भी रहे। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव की भूमिका भी निभाई। राष्ट्रीय परीक्षण एवं कैलिब्रेशन प्रयोगशालाओं के मान्यता बोर्ड (NABL) के अध्यक्ष रहे। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU) इम्फाल के कुलपति भी थे।
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