'मैं बेगुनाह तो मेरे खिलाफ महाभियोग क्यों', जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति के सामने पुलिस पर उठाए सवाल

Justice Varma submits reply: संसदीय जांच समिति के समक्ष अपने जवाब में जस्टिस वर्मा ने कहा कि वह घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति नहीं थे और सवाल उठाया कि जब अधिकारी घटनास्थल को सुरक्षित करने में विफल रहे तो उन पर महाभियोग क्यों चलाया जाना चाहिए.

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Justice Varma submits his reply: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद संसदीय समिति के समक्ष औपचारिक जवाब दाखिल किया है. अपने बचाव में जस्टिस वर्मा ने खुद को बेगुनाह बताते हुए अपने खिलाफ शुरू की गई महाभियोग कार्यवाही पर कड़ी आपत्ति जताई है. जस्टिस वर्मा ने कहा कि जब दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर आग लगी तो वह मौके पर मौजूद नहीं थे. उन्होंने दावा किया कि वहां से कोई नकदी बरामद नहीं हुई और घटना के दौरान मानक प्रक्रियाओं का पालन न करने के लिए दिल्ली पुलिस, अग्निशमन अधिकारियों और सीआरपीएफ ही जिम्मेदार हैं.

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अपने जवाब में जस्टिस वर्मा ने क्या कहा?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति के समक्ष पेश किए जवाब में कहा कि वो घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे. घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने आगजनी या आग लगने की आशंका के संबंध में अपनी ड्यूटी का पालन नहीं किया तो उसका खामियाजा उन्हें क्यों भुगतना पड़े? जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ शुरू की गई महाभियोग कार्यवाही पर भी कड़ी आपत्ति जताई. सूत्र बताते हैं कि जस्टिस वर्मा ने सवाल उठाया कि जब घटनास्थल पर मौजूद अधिकारी कथित अपराध स्थल को सुरक्षित करने में ‘विफल’ रहे तो उन पर महाभियोग क्यों चलाया जाना चाहिए.

14 मार्च की घटना से शुरू हुआ था विवाद

जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में पिछले साल 14 मार्च को जब आग लगी तो वहां बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई. जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किया. इन-हाउस जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल बनाया गया. 4 मई को सौंपी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को कदाचार का दोषी ठहराया.सीजेआई ने उन्हें इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई.सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को इन-हाउस जांच रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ने अलग से तीन सदस्यीय संसदीय समिति गठित की.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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