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झारखंड ने तो हद ही कर दी! कुत्तों की नसबंदी का डेटा देख भड़का सुप्रीम कोर्ट, राज्यों को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्तों को ना हटाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई. कर्नाटक ने संस्थानों की पहचान तो की, लेकिन एक भी कुत्ता नहीं हटाया.

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आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने राज्यों के हलफनामों को ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला करार देते हुए कहा कि धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल द्वारा पेश रिपोर्ट ने कई राज्यों की पोल खोल दी. कोर्ट ने वकीलों को संभालना मुश्किल बताते हुए सिस्टम सुधार पर जोर दिया. सुनवाई में एबीसी सेंटर्स, डॉग शेल्टर्स, संस्थानों से कुत्ते हटाना और हाईवे पर मवेशी समस्या प्रमुख मुद्दे रहे.

झारखंड ने तो हद ही कर दी


झारखंड के आंकड़ों ने कोर्ट को सबसे ज्यादा भड़का दिया. राज्य ने दावा किया कि 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की गई, जिसमें से 1.6 लाख सिर्फ दो महीनों में. बेंच ने इसे मनगढ़ंत बताते हुए सवाल उठाया कि एक गाड़ी से एक दिन में इतने कुत्ते कैसे पकड़े जा सकते हैं. असम की स्थिति भी चिंताजनक रही. वहां 2024 में 1.66 लाख और 2025 के जनवरी में ही 20,900 डॉग बाइट केस दर्ज हुए, लेकिन नसबंदी सेंटर्स और मैनपावर की कमी साफ दिखी. कोर्ट ने असम को छह माह का समय दिया, लेकिन सख्त निर्देश जारी किए.

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गलत डेटा बर्दाश्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्तों को ना हटाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई. कर्नाटक ने संस्थानों की पहचान तो की, लेकिन एक भी कुत्ता नहीं हटाया. बेंच ने हर शैक्षणिक संस्थान में बाउंड्री वॉल अनिवार्य बताई, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी है. हरियाणा जैसे राज्यों के हलफनामे अस्पष्ट पाए गए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि गलत डेटा बर्दाश्त नहीं होगा. केवल असम ने डॉग बाइट के आंकड़े दिए, बाकी राज्यों ने हवा में बातें कीं. गोवा के बीचों पर कुत्तों की मौजूदगी से पर्यटन को नुकसान हो रहा, जहां वे शैक और मछली अवशेषों पर गुजारा करते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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