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I-PAC का बड़ा फर्जीवाड़ा? जिस कंपनी से लिया ₹13.5 करोड़ का लोन, उसका कोई वजूद ही नहीं

I-PAC के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने 17 दिसंबर 2021 को 'रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी से लोन लिया था. इस कंपनी का पता रोहतक का 'अशोका प्लाजा' दिया हुआ था.

ED की छापेमारी के बाद I-PAC विवादों में घिरी थी.

कोलकाता में 8 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद से विवादों में घिरी फर्म I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) को लेकर एक नया खुलासा हुआ है. द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि I-PAC ने 2021 में रोहतक की एक फर्म से 13.50 करोड़ रुपये का लोन लेने का दावा किया था, वह कंपनी सरकारी रिकॉर्ड में कहीं दर्ज ही नहीं है.

रोहतक के उस पते पर 'रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक कंपनी जरूर थी, लेकिन उसे अगस्त 2018 में ही रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रिकॉर्ड से हटा दिया गया था. यानी लोन के लेन-देन से तीन साल पहले ही वह बंद हो चुकी थी. कंपनी के सभी छह शेयरधारकों ने I-PAC के साथ किसी भी तरह के लेन-देन या लोन देने की जानकारी से इनकार किया है.

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I-PAC के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने 17 दिसंबर 2021 को 'रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी से लोन लिया था. इस कंपनी का पता रोहतक का 'अशोका प्लाजा' दिया हुआ था. लेकिन पिछले छह साल से वहां इस नाम की कोई कंपनी नहीं है.

27 जून, 2025 को एक और घोषणा में, I-PAC ने कहा कि उसने 2024-25 में 13.50 करोड़ रुपये के लोन में से 1 करोड़ रुपये चुका दिए हैं और 12.50 करोड़ रुपये की बकाया रकम बाकी है.

'रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी के पूर्व शेयरधारकों, विक्रम मुंजाल, संदीप राणा, विजेंद्र, बलजीत जांगड़ा, प्रदीप कुमार और जगबीर सिंह ने बताया कि कंपनी जमीन के कारोबार के लिए बनाई गई थी, लेकिन काम न होने के कारण इसे जल्द ही बंद कर दिया गया था. साथ ही कहा कि हमें किसी भी लेन-देन की कोई जानकारी नहीं है. यह कंपनी 2013 में बनाई गई थी, लेकिन बंद होने के बाद इसका रिकॉर्ड 2018 में ही हटा दिया गया था.

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इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि इस मामले में जब I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन और चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क किया तो कोई जवाब नहीं दिया गया.

रिकॉर्ड्स के मुताबिक, I-PAC की स्थापना 2015 में पटना में हुई थी और 2022 में इसका कार्यालय कोलकाता शिफ्ट कर दिया गया.


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