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जब कोर्टरूम में मांझे से काटी गई पेंसिल, HC में लाइव डेमो देख सन्न रह गए जज, बोले- अब पतंगबाजी ही बैन करेंगे

कोर्ट 11 दिसंबर, 2025 को इसने इंदौर और आसपास के जिलों में चाइनीज मांझे पर बैन लगा दिया था. 12 जनवरी, 2026 को कोर्ट ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती के पालन का आदेश दिया था.

मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में उस वक्त सब हैरान हो गए, जब पतंग के मांझे से एक पेंसिल आसानी से कट गई. शुक्रवार की सुनवाई के दौरान, कोर्ट के सामने एक बैन नायलॉन मांझा पेश किया गया. जैसे ही जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने इसका परीक्षण किया और धागे को एक पेंसिल के ऊपर रगड़ा गया तो पेंसिल आसानी से कट गई.

पीठ ने टिप्पणी की कि यदि एक ठोस पेंसिल इतनी आसानी से काटी जा सकती है, तो मानव जीवन के लिए खतरा अपने आप ही है. कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यदि अधिकारी इस खतरे को कंट्रोल करने में नाकाम रहते हैं, तो उनके पास पतंगबाजी पर पूरी तरह से बैन लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं हो सकता.

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कोर्ट को बताया गया कि इस मांझे के निर्माण, बिक्री और यूज पर पूरी तरह बैन है. इस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन से तीखे सवाल किए और कहा कि जहां कागज पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत दूसरी ही कहानी बयां कर रही है.

कोर्ट ने अखबारों में छपी कटे हुए गले, जख्मी लोगों और क्षत-विक्षत पक्षियों की तस्वीरों का जिक्र करते हुए कहा कि ये तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं. कोर्ट ने बताया कि गुजरात में हर साल बड़े पैमाने पर पतंग उत्सव आयोजित किए जाते हैं, फिर भी वहां ऐसी मौतों की खबरें कम ही आती हैं. कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को चाइनीज मांझे को खत्म करने के लिए एक सख्त और व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया है.

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मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी. इंदौर बेंच ने पहले ही इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया है. 11 दिसंबर, 2025 को इसने इंदौर और आसपास के जिलों में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था. 12 जनवरी, 2026 को कोर्ट ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती के पालन का आदेश दिया. इन निर्देशों के बावजूद मकर संक्रांति के दौरान कई घातक घटनाओं की जानकारी सामने आई. कोर्ट ने इस पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बैन के बाद भी मौत हो रहे हैं.


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