भारतीय थल सेना अपनी मैकेनाइज्ड फोर्स को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने जा रही है. इसके तहत सेना का फोकस सिर्फ नए हथियार खरीदने पर नहीं, बल्कि अपने मौजूदा हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म्स को ही आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने पर है. इस बड़े बदलाव को रफ्तार देने के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय और थल सेना मिलकर एक खास योजना पर काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में सेना की वेस्टर्न कमांड आगामी 14 दिसंबर 2026 को चंडीमंदिर स्टेशन पर एक बड़े ‘मैकेनाइजेशन टेक्नोलॉजी सेमिनार’ का आयोजन करने जा रही है.
‘चक्र’ नाम से तैयार हो रहा भविष्य का रोडमैप
इस महत्वपूर्ण सेमिनार को ‘CHAKRA: Transforming Existing Platforms for Future Combat’ (मौजूदा सैन्य प्लेटफॉर्म को भविष्य के युद्ध के लिए आधुनिक बनाना) नाम दिया गया है. राजधानी दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में इस सेमिनार का कर्टेन रेजर लॉन्च किया गया. इस कार्यक्रम को वेस्टर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने लॉन्च किया. सेमिनार का आयोजन वेस्टर्न कमान और ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स’ (SIDM) के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है.
पुराने हथियारों में फूंकी जाएगी नई जान
इस सेमिनार का सबसे बड़ा जोर ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर होगा. सेमिनार में इस बात पर मंथन किया जाएगा कि यदि कोई सैन्य उपकरण या हथियार पुराना हो गया है, तो उसे आधुनिक तकनीक से लैस करके दोबारा घातक कैसे बनाया जाए. इसके साथ ही, सेना की वर्तमान ऑपरेशनल जरूरतों और तकनीकी कमियों की पहचान की जाएगी, ताकि जरूरत के अनुसार सही उपकरणों और तकनीक को नई धार दी जा सके.
खरीदने से ज्यादा अपग्रेड करने पर जोर
कर्टेन रेजर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि इंडियन आर्मी का मुख्य लक्ष्य सिर्फ बाहर से हथियार खरीदना नहीं है, बल्कि अपने वर्तमान हथियारों को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से अपग्रेड करना है. ऐसा होने से न केवल सेना की युद्धक क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी मजबूत होगी, बल्कि देश के ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को भी बड़ा सहारा मिलेगा. इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र बलों, घरेलू रक्षा उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तालमेल बनाकर सेना की जरूरतों के मुताबिक व्यावहारिक और प्रभावी तकनीकी समाधान तैयार करना है.