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पहलगाम हमले के आखिरी आतंकी हाशिम मूसा को सेना ने कैसे किया ढेर? 527 दिन से चल रही थी तलाश

पहलगाम आतंकी हमले का बदला पूरा हो गया है, क्योंकि हमले के लिए जिम्मेदारी आखिरी आतंकी को भी ढेर कर दिया है. भारतीय सेना ने आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल हाशिम मूसा को एनकाउंटर को मार गिराया. भारतीय सेना 527 दिन से उसे तलाश रही थी तो आइए जानते हैं कि आतंकी को कैसे ढेर किया गया?

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हाशिम मूसा को भारतीय सेना 527 दिन से तलाश कर रही थी. CREDIT: SCREENGRAB(X- ANI/India Global Review)

भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले के 26 मृतकों का बदला ले लिया है. जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में यूसमर्ग के कोराग इलाके में आतंकी हमले के आखिरी हमलावर लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर हाशिम मूसा को भी ढेर कर दिया गया है. 30 सितंबर 2026 को मुखबिर से सुराग मिलने के बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने जॉइंट सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसे ऑपरेशन कोराग नाम दिया गया और हाशिम मूसा को ढेर करके करीब 527 दिन से चल रही तलाश को खत्म किया. बदले की आग को ठंडा किया, क्योंकि उस आतंकी ने बेगुनाह निर्दोष भारतीयों को अंधाधुंध गोलियां मारकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था.

पीर पंजाल एरिया सक्रिय था हाशिम मूसा

सुरक्षाबलों के अनुसार, हाशिम मूसा को सुलेमान शाह उर्फ मूसा, फौजी मूसा और मोहम्मद आसिफ भी कहा जाता था. हाशिम मूसा के नेतृत्व में लश्कर-ए-तैयबा 5 साल से पीर पंजाल एरिया सक्रिय था. राजौरी, गुलमर्ग और पहलगाम इसके मेन टारगेट एरिया थे, इसलिए हाशिम मूसा पहलगाम आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक था. वह पीर पंजाल और कश्मीर घाटी के जंगलों में ही छिपकर रहता था. वह युद्ध लड़ने में माहिर और प्रशिक्षित था. मूसा ने यासिर और सुलेमान के साथ 2021 के अंत में जम्मू के जंगलों से होते हुए भारत में घुसपैठ की थी. उसके बाद से अब तक राजौरी-पूंछ हाईवे पर जितने भी आतंकी हमले हुए, मूसा ही उनके लिए जिम्मेदार था.

2021 से आतंकी हमले कर रहा हाशिम मूसा

सुरक्षाबलों के अनुसार, अक्टूबर 2021 में राजौरी के भट्टा दुरियन में गोलीबारी हुई थी, जिसमें सेना के 9 जवान मारे गए थे. अप्रैल 2023 में सेना के वाहन पर हमले में 5 जवान मारे गए थे. 5 मई 2023 को जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले के कंडी जंगल में हुए धमाके में भारतीय सेना की 9 पैरा यूनिट के 5 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद सेना के जवान आतंकियों की तलाश में पुंछ और राजौरी के जंगलों में फैल गए तो मूसा पीर पंजाल के उत्तर में कश्मीर घाटी में चला गया, जहां अगस्त 2023 में कुलगाम के जंगलों में हलन स्थित सेना के अस्थायी ठिकाने पर हमला किया गया, जिसमें 4 सैनिक मारे गए. दिसंबर में राजौरी-पूंछ हाईवे पर डेरा की गली में सेना के वाहन पर हमला करके 4 सैनिकों को मारा.

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हाशिम का चौथा साथी बना कुलगाम निवासी

सुरक्षाबलों के अनुसार, जुलाई 2024 कुलगाम के कैमोह गांव का निवासी 24 वर्षीय जुनैद अहमद भट भी हाशिम, यासिर और सुलेमान का साथी बन गया. जुनेद के आने के बाद पीर पंजाल के दक्षिण में छिपा आतंकी गुट 2 भागों में बंट गया. हाशिम मूसा और यासिर का एक गुट बना. दूसरा गुट सुलेमान और जुनैद का बना. मूसा और यासिर पीर पंजाल की पहाड़ियों के ऊपरी इलाकों में छिपे और पुंछ-राजौरी के साथ दक्षिण और मध्य कश्मीर के बीच आते-जाते रहे. सुलेमान और जुनैद मध्य और निचले पहाड़ी इलाकों में छिप गए. 20 अक्टूबर 2024 को लश्कर के 2 आतंकवादियों ने सोनमर्ग के गागांगीर में जेड-मोरह सुरंग परियोजना कैंप पर हमला करके डॉक्टर समेत 7 श्रमिकों की हत्या कर दी.

सबसे पहले सेना ने जुनैद को किया था ढेर

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हमले की जांच शुरू की तो CCTV फुटेज से जुनैद की पहचान हुई. 4 दिन बाद मूसा ने यासिर के साथ मिलकर गुलमर्ग के बुटापथरी के हाई सिक्योरिटी वाले एरिया में हमला करके 2 सैनिकों और 2 कुली को मार गिराया. इसके बाद दिसंबर 2024 में श्रीनगर के बाहरी इलाके दाचीगाम के जंगलों में एनकाउंटर में जुनैद मारा गया. सुलेमान भागने में कामयाब रहा, लेकिन जुनैद की हत्या मूसा आतंकी गिरोह के खिलाफ पहली बड़ी सफलता थी. इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा के 2 आतंकवादी सुलेमान से जुड़ गए. जिसके बाद पांचों ने मिलकर 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकी हमला करके 26 हत्याएं की और आतंकियों की बर्बरता देखकर पूरी दुनिया हिल गई.

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अगस्त 2025 में सुलेमान और 2 आतंकी ढेर

अगस्त 2025 में सुलेमान और उसके दोनों साथियों को दाचीगाम के जंगलों के ऊपरी इलाकों में सेना केपैराट्रूपर्स ने एनकाउंटर में मार गिराया. सुरक्षा बलों को दक्षिण और मध्य कश्मीर को जोड़ने वाले पीर पंजाल पर्वत की ऊपरी चोटियों में अन्य आतंकियों के छिपने का सुराग मिला तो सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीमों ने अस्थायी ऑपरेशनल बेस बनाकर सर्च ऑपरेशन चलाया. 5 सितंबर 2026 को मूसा और यासिर का सुराग अशदार गली में मिला. यहां मुठभेड़ में यासिर मारा गया, जबकि मूसा बच निकला. 17 सितंबर को उधमपुर में सद्दाम और मुस्तफा को ढेर किया गया.

एक आतंकी का शव भी गली सड़ी हालत में इसी महीने मिला था. सितंबर के आखिरी सप्ताह में सुरक्षा बलों को यूसमर्ग के पास मूसा के छिपे होने का सुराग मिला और सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया. इस तरह एक महीने के अंदर सेना ने पांचों आतंकियों को ढेर करके पहलगाम हमले का बदला ले लिया.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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