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क्या है सेना की ‘AMAR’ चाल? जिससे कांपेंगे दुश्मन देश, LoC के सैनिकों को दी जा रही ट्रेनिंग

भारतीय सेना अब केवल अत्याधुनिक राइफलों और मिसाइलों के दम पर ही नहीं, बल्कि अपनी शारीरिक ताकत और फुर्ती से भी दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार है. इसके लिए LoC पर तैनात हर जवान को ‘AMAR’ ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसके बाद बिना हथियार के भी दुश्मन का गला दबा देंगे हमारे वीर सैनिक. पढ़ें जम्मू से पंकज शर्मा की विशेष रिपोर्ट

ऑपरेशन सिंदूर की रात जिसे कोई भारतवासी भूला नहीं होगा. पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों को जला कर राख करने वाली भारतीय सेना अब अत्याधुनिक हथियारों के साथ साथ अब जवानों को बिना हथियार दुश्मन से लड़ने के लिए विशेष ‘AMAR ट्रेनिंग’ (Army Martial Arts Routine) ट्रेनिंग भी दी जा रही है. यह विशेष कॉम्बैट ट्रेनिंग खासतौर पर निहत्थी स्थिति में दुश्मन का सामना करने की क्षमता विकसित करती है. LoC पर तैनात हर जवान को यह प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाता है, ताकि अचानक आमने-सामने की स्थिति में भी वह दुश्मन पर भारी पड़ सके.

क्या है AMAR ट्रेनिंग? क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

LoC पर परिस्थितियां अक्सर अप्रत्याशित होती हैं. कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जहाँ जवान और दुश्मन आमने-सामने आ जाते हैं. ऐसी स्थिति में हथियार के बिना भी दुश्मन पर हावी होने के लिए 'AMAR' ट्रेनिंग शुरू की गई है. इस ट्रेनिंग में क्लोज कॉम्बैट यानि बहुत करीब से दुश्मन को काबू करने की कला, ग्रिप ब्रेक यानि अगर दुश्मन जवान को पकड़ ले, तो पल भर में उस पकड़ को छुड़ाकर पलटवार करना, हथियार छीनने की तकनीक और तेज प्रतिक्रिया जैसे कौशल शामिल हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिस्थिति चाहे जवान के पास हथियार हो या न हो,वह आत्मरक्षा और आक्रामक कार्रवाई दोनों में सक्षम रहे.

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने यह साबित कर दिया था कि भारतीय सेना किसी भी हद तक जाकर दुश्मन का खात्मा कर सकती है. 'AMAR' ट्रेनिंग LoC पर तैनात हर जवान के लिए अनिवार्य कर दी गई है. अत्याधुनिक हथियारों और मार्शल आर्ट्स के इस अनूठे संगम ने भारतीय सेना को दुनिया की सबसे घातक फोर्स में से एक बना दिया है. अब जवान के पास हथियार हो या न हो, वह आत्मरक्षा भी करेगा और जरूरत पड़ने पर आक्रामक होकर दुश्मन का अंत भी.

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