भारत अपने खुद की हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन के सपने को पूरा करने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में भारतीय रेलवे जापान की E10 जैसी तेज रफ्तार बुलेट ट्रेन बना रहा है, जिसकी स्पीड 350Kmph तक हो सकती है. ये प्रोजक्ट भारत के मेक इन इंडिया मिशन का हिस्सा है, जिसमें विदेशी टेक्नोलॉजी पर डिपेंड ना रहकर देश में ही ज्यादा तकनीक विकसित की जाएगी. भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक इन स्वदेशी बुलेट ट्रेनों को विकसित किया जाए और साथ ही उन्हें पटरियों पर दौड़ाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए.
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क्या है प्लान?
केंद्रीय कैबिनेट ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट के लिए ज्यादा बजट को मंजूरी दी है, जिसके बाद इसे तेजी से डेवलेप किया जा रहा है. बजट पास होने के बाद इसकी कुल लागत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है. इस प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने में मदद के तौर पर केंद्रीय बजट से करीब 1 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान ने 2024 में कहा कि वो धीरे-धीरे मौजूदा E%5 सीरीज की ट्रेनें बनाना बंद कर देगा, जिसके बाद भारत ने B35 बुलेट ट्रेनों पर काम करना शुरू किया.
कौन से रूट्स होंगे?
रेल मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, MAHSR प्रोजेक्ट 508 किलोमीटर लंबा है. ये रूट गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरेगा. इसमें कुल 12 स्टेशन बनाने का प्लान है, जिनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं. वहीं, जापान ने बताया कि उसकी नई E10 ट्रेनों का प्रोडक्शन 2030 में शुरू हो सकता है और ये ट्रेनें 2034 तक पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार हो जाएंगी. इसके साथ ही, भारत ने अपनी खुद की B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है. साथ ही ‘भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम’ (BTCS) पर भी काम जारी है, जो देश का अपना ट्रेन कंट्रोल और सिग्नलिंग सिस्टम है. ये दोनों की स्पीड को कंट्रोल करने, ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने में मदद करेगा. ये सिस्टम चीन के CTCS जैसा ही है, जिसका इस्तेमाल नॉर्मल और हाई-स्पीड, दोनों तरह की ट्रेनों के लिए किया जाता है.