Congress Rejects Regime Change Allegations: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश और फ्रांस की अशांति से किए जाने को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के जरिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहा है. एनएनआई से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति पर हमलों का समर्थन नहीं करती है. उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी की फिक्र खास तौर से चुनाव आयोग की तरफ से किए जाने वाले वोटर लिस्ट के एसआईआर से जुड़ी हैं.
SIR को लेकर कांग्रेस की फिक्र
शशि थरूर ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. उन्होंने इस प्रक्रिया को अनियमित और संभावित रूप से गैर-कानूनी बताया. उन्होंने इसमें सुधार की मांग करते हुए कहा कि ये मामला संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, न कि सरकार को गिराने की कोई कोशिश. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भी भारत और यूरोपीय देशों के विरोध प्रदर्शनों की तुलना करने की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के नैरेटिव मुसलमानों को गलत तरीके से हिंसा से जोड़ते हैं. साथ ही, इनका इस्तेमाल उन शांतिपूर्ण आंदोलनों को बदनाम करने के लिए किया जाता है, जो चुनावी पारदर्शिता, एजुकेशनल रिफॉर्म और इंसाफ की मांग कर रहे हैं.
केंद्र ने लगाया साजिश का आरोप
इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया कि भारतीय युवाओं को उकसाने और हिंसा भड़काने की कोशिशें की गई हैं. उन्होंने इसकी तुलना बांग्लादेश और फ्रांस की अशांति से की. उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक बदलाव सिर्फ चुनावों के जरिए ही हो सकता है. केंद्र सरकार चुनावी गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को भी खारिज करती आई है.
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय विरोध नेटवर्क का दावा
यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब फ्रांस के छात्र विरोध आंदोलन और उसके समर्थकों की जांच की जा रही है. 9 अक्टूबर को छपी ‘फॉक्स न्यूज डिजिटल’ की एक जांच में 50 ऐसे संगठनों की पहचान की गई है, जो कथित तौर पर इस आंदोलन और इसके बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं. रिपोर्ट के मुताबिर, इनमें से 15 स्टूडेंट या यूथ ग्रुप हैं, जबकि बाकी 35 में ट्रेड यूनियन, राजनीतिक दल, समाजवादी और कम्युनिस्ट संगठन, तथा नागरिक अधिकार समूह शामिल हैं.
जांच में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस और ब्राजील सहित कई देशों में सक्रिय नेटवर्क का भी पता चला है. इसमें ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ नामक संगठन का जिक्र है, जो फ्रांस में छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों का एक समूह है. आरोप है कि इस संगठन ने ऑनलाइन विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया और भारत में हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के साथ इनकी तुलना की.