भारत के अस्पताल क्षेत्र में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है. ब्लैकस्टोन, केकेआर, टीपीजी और जनरल अटलांटिक जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों ने पिछले पांच साल में भारतीय अस्पताल चेन में करीब 10 अरब डॉलर लगाए हैं. इस पैसे से नए अस्पताल, महंगी मेडिकल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिला है. लेकिन निवेश बढ़ने के साथ इलाज की बढ़ती कीमत और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. भारत में अस्पताल और बेड की पहले से ही कमी है. ऐसे में निजी निवेश ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में मदद की है, लेकिन अब बहस इस बात पर है कि क्या निजी पूंजी के दम पर बढ़ता अस्पताल कारोबार आम लोगों को इलाज की पहुंच से दूर कर रहा है. प्राइवेट इक्विटी यानी PE से जुड़े अस्पताल देश के कुल बेड का 5% से भी कम हिस्सा रखते हैं, लेकिन कैंसर और कार्डियक जैसी महंगे इलाजों में उनकी मजबूत पकड़ है.
अस्पतालों की कमी ने बनाया बड़ा निवेश अवसर
भारत में हर 1,000 लोगों पर करीब 1.3 अस्पताल बेड हैं. दूसरी ओर, आमदनी और जिंदगी की जरूरतों के बढ़ने के साथ कैंसर, दिल की बीमारी और दूसरी गंभीर बीमारियों के इलाज की मांग भी बढ़ रही है. सरकार ने 2021 में करीब 600 अस्पताल परियोजनाओं की पहचान की थी, जिनके लिए लगभग 32 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत बताई गई थी. विदेशी निवेशकों ने इसी कमी को बड़े कारोबार के रूप में देखा. छोटे और अलग-अलग अस्पतालों को खरीदकर बड़ी अस्पताल चेन बनाई जा रही हैं, जिससे निवेशकों को लंबे समय में ज्यादा कमाई की उम्मीद है.
केकेआर और टेमासेक को मिला बड़ा फायदा
केकेआर ने जुलाई 2024 में केरला के बेबी मेमोरियल में निवेश किया था. करीब 1,000 बेड वाले इस अस्पताल ने वित्त वर्ष 2026 में 6 अरब रुपये की कमाई की. अगस्त में केकेआर ने स्वीडिश हॉस्पिटल चैन मेडिकवर के भारतीय कारोबार को 1.4 अरब डॉलर में खरीदने पर सहमति जताई. इससे दक्षिण भारत में केकेआर के अस्पताल बेड करीब दोगुने होकर 10,000 तक बढ़ सकते हैं. केकेआर पहले रेडियंट लाइफ केयर और मैक्स हेल्थकेयर में भी निवेश कर चुका है. वहीं, टेमासेक को मणिपाल हेल्थ में 2017 के निवेश से करीब 10 गुना रिटर्न मिला. क्रिसिल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में निजी अस्पतालों की कमाई 15% तक बढ़ सकती है.
इलाज महंगा होने पर बढ़ी चिंता
निजी अस्पतालों की कमाई बढ़ने के साथ इलाज की लागत भी बढ़ रही है. संसद की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेडिकल महंगाई 13% सालाना तक पहुंच गई है. संसदीय समिति के अनुसार, निजी अस्पतालों में इलाज सरकारी अस्पतालों की तुलना में औसतन 5 से 10 गुना महंगा है. कैंसर, दिल की बीमारी, किडनी फेलियर और मैटरनिटी सेवाओं में यह अंतर ज्यादा है. अगस्त में संसदीय समिति ने विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई. समिति ने कहा कि बड़े कॉरपोरेट ग्रुप्स छोटे और कम लागत वाले अस्पतालों को खरीद रहे हैं. उसने विदेशी निवेश नियमों पर दोबारा विचार, इलाज की कीमतों पर तय सीमा और अस्पतालों के लिए अलग रेगुलेटर बनाने की सिफारिश की.
बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच बढ़ा विवाद
बीमा कंपनियों का आरोप है कि कुछ निजी अस्पताल महंगी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं और मरीजों को ज्यादा खर्च वाले इलाज करते हैं. अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां भुगतान में देरी करती हैं और पूरा भुगतान नहीं करती. रोबोटिक सर्जरी जैसी नई तकनीकों को लेकर भी विवाद है. बीमा कंपनियों का सवाल है कि अगर रोबोटिक प्रक्रिया नॉर्मल सर्जरी से काफी महंगी है, तो क्या मरीज को उसका फायदा भी उसी तरह मिलता है. मुंबई की 40 वर्षीय बिजनेस कंसल्टेंट पूनम अ. का मामला इसका उदाहरण है. उन्होंने रोबोटिक सर्जरी कराई और उम्मीद थी कि उनकी 15 लाख रुपये के बेस कवर वाली बीमा पॉलिसी इसका खर्च उठाएगी. लेकिन बीमा कंपनी ने सर्जरी के रोबोटिक हिस्से का खर्च देने से इनकार कर दिया. आखिरकार उन्हें यह रकम खुद ही चुकानी पड़ी.
रेगुलेशन से कितना बदलेगा हाल?
IRDAI ने कैशलेस इलाज और इलाज की मंजूरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं. लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सलवेनिया के वहार्टन स्कूल के प्रोफेसर लॉटन रॉबर्ट बर्न्स के मुताबिक, अमेरिका में भी 50 साल से यह बहस चल रही है कि क्या रेगुलेशन से स्वास्थ्य खर्च को कंट्रोल किया जा सकता है. ईक्यूटी ग्रुप के चेयरमैन जीन एरिक सलाता ने चेतावनी दी है कि ज्यादा सरकारी दखल भारत के निवेश माहौल को नुकसान पहुंचा सकता है. दूसरी ओर, अको जनरल इन्श्योरेन्स के सीईओ अनिमेष दास का कहना है कि भारत में इलाज लगातार महंगा होता रहा और बीमा सस्ता रहा तो सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होगा, जो सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे में नहीं आते लेकिन बढ़ते निजी इलाज का खर्च भी आसानी से नहीं उठा सकते.
संबंधित खबरें
अरब सागर में भारतीय नौसेना ने लुटेरों से छुड़ाए जहाज समेत 20 क्रू मेंबर्स
4 hrs agoगोकर्ण बीच पर बड़ा हादसा, लहरों में बह गए बेंगलुरु के 3 टेक कर्मचारी
5 hrs ago120 KMPH की हवा, भारी बारिश... अर्नब के बाद चक्रवात 'मुरासु' का विकराल रूप
5 hrs agoNCP विलय की चर्चा क्यों, अमित शाह से अजित गुट के नेताओं को क्या मिली नसीहत?
7 hrs ago'आप विदेशी मदद से PM बने', राहुल का PM मोदी पर पलटवार, खुली बहस की चुनौती
9 hrs agoओडिशा में किसानों पर दोहरी मार, अर्नब के बाद मुरासु साइक्लोन का खतरा
10 hrs ago'हवाई सफर मत करें', प्लेन के किराये में भारी बढ़ोतरी पर SC की दो टूक
13 hrs agoदिवाली पर ग्रीन पटाखे फोड़ने की SC ने दी मंजूरी; घंटे भी किए फिक्स
13 hrs agoआजम खान को SC से तगड़ा झटका, ED की गिरफ्तारी पर तुरंत सुनवाई से इनकार
13 hrs agoक्या स्टिंग ऑपरेशन करना भारत में है कानूनी, क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट?
13 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines