INDIA ब्लॉक ने SIR, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य प्रदर्शनकारियों को आकाशवाणी भवन के पास रोक लिया. वहां भी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए. दिल्ली पुलिस के अधिकारी उन्हें मनाने आए, लेकिन वे चुनाव आयोग दफ्तर में जाने की मांग पर अड़े रहे. सभी कोशिशें करने के बाद दिल्ली पुलिस ने देर रात राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को डिटेन किया और धरना खत्म कराया. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस विरोध प्रदर्शन कर रहे सांसदों, विधायकों या मंत्रियों को गिरफ्तार या डिटेन कर सकती है? इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मियों के लिए क्या नियम हैं?
कुछ मामलों में छूट तो कुछ मामलों में गिरफ्तारी संभव
दिल्ली में अकसर विरोध प्रदर्शनों के चलते पुलिस ट्रैफिक एडवाइजरी लागू करने के साथ-साथ धारा 163 लागू कर देती है. लेकिन विरोध प्रदर्शनों करके धारा 163 का उल्लंघन कर दिया जाता है. लेकिन पुलिस की कार्रवाई इस मामल में न होकर, विरोध प्रदर्शन या धरना खत्म कराने के लिए होती है. वहीं अगर प्रदर्शन-धरना सांसद कर रहे हो तो अपराध या हिंसा होने या कानून व्यवस्था बिगड़ने पर पुलिस सांसदों को हिरासत में ले सकती है. गंभीर मामलों में गिरफ्तार भी कर सकती है. संसद के बाहर सार्वजनिक जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहा हो तो भी सांसदों को हिरासत में लिया जा सकता है. वहीं सांसद अगर संसद के अंदर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो स्पीकर-सभापति की अनुमति से ही उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है. वहीं उनके सुरक्षाकर्मियों को भी कुछ नियम फॉलो करने होते हैं.
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षाकर्मियों के लिए प्रोटोकॉल
विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी सांसद, विधायक या मंत्री को पुलिस के द्वारा हिरासत में लिया जाता है तो इस दौरान भी वे उनके साथ साए की तरह रहते हैं, ताकि खतरे से उन्हें बचाया जा सके. अगर पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बस या जीप में बैठाती है तो सुरक्षाकर्मी भी साथ में वहीं जाते हैं, जहां पुलिस उन्हें लेकर जाती है. इसके लिए पुलिस ही उनसे को-ऑर्डिनेट करती है. जब उन्हें सांसदों-विधायकों या मंत्रियों को डिटेन करके ले जाती है तो जहां उन्हें रखा जाता है, वहां उनके PSO ही हथियार लेकर जा सकते हैं, बाकी बाहर खड़े होते हैं. सांसद, विधायक या मंत्री को हिरासत में लेने की जानकारी वे अपने उच्च अधिकारियों, सुरक्षा मुख्यालय या कंट्रोल रूम को देते हैं. वहीं प्रदर्शन उग्र होने पर गिरफ्तारी की स्थिति में सुरक्षाकर्मियों को ही सेल के बाहर तैनात किया जाता है, ताकि वे ही उनकी सुरक्षा करें.
क्या प्रदर्शन के दौरान सांसद गिरफ्तार हो सकते?
सांसद, विधायक या मंत्री के विरोध प्रदर्शन के दौरान अगर हिंसा हो जाए या कानून व्यवस्था बिगड़ जाए तो पुलिस उसमें शामिल सांसदों, विधायकों या मंत्रियों को गिरफ्तार कर सकती है. अगर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का उल्लंघन हो तो भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा सकता है, चाहे वह सांसद हो, विधायक या मंत्री हो.
संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन हो तो क्या होगा?
अगर सांसद या मंत्री संसद के बाहर किसी पब्लिक प्लेस पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हों तो सामान्य कानून लागू होते हैं और पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले सकती है. वहीं अगर संसद भवन के अंदर सांसद या मंत्री विरोध प्रदर्शन करते हैं और उन्हें हिरासत में लेना हो तो लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति की अनुमति से ही उन्हें डिटेन या गिरफ्तार किया जा सकता है. वहीं सांसदों या मंत्रियों को डिटेन या अरेस्ट करने की जानकारी लोकसभा या राज्यसभा सभापति को देनी होगी. वे परमिशन देंगे, उसके बाद ही सांसद या मंत्री को गिरफ्तार या डिटेन किया जा सकता है.
सांसदों को गिरफ्तारी से छूट कैसे मिलती है?
सांसदों या मंत्रियों को कुछ मामलों में गिरफ्तारी से छूट भी मिल सकती है. यह छूट संसद सत्र शुरू होने से 40 दिन पहले और सत्र खत्म होने के बाद 40 दिन लागू रहती है. लेकिन छूट सिर्फ प्रदर्शन या धरने के मामले में मिलेगी. आपराधिक मामलों में यह छूट नहीं मिलेगा. अगर किसी सांसद या मंत्री अपराध में संलिप्त है और उसे गिरफ्तार किया जाना जरूरी है तो पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है और आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है.
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