देश की सीमाओं पर घुसपैठ रोकने और पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले रणनीतिक ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ को अभेद्य बनाने के लिए भारतीय सेना और BSF ने बड़ा सुरक्षा प्लान लागू कर दिया है. बांग्लादेश सीमा पर चार नए सैन्य ठिकाने तैयार किए गए हैं. साथ ही, अब आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक हथियारों से लैस कमांड सेंटर के जरिए सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है. बीएसएफ सूत्रों ने न्यूज़ 24 को जानकारी देते हुए बताया कि ईस्टर्न स्टेट में से सिक्युरिटी अरेंजमेंट को ज्यादा से ज्यादा मजबूत किया जा रहा है. सैन्य तैयारी तो भारत मे हो रही है लेकिन दर्द बांग्लादेश को हो रहा है.
आपको बता दे कि असम के धुबरी स्थित बामुनी, बिहार का किशनगंज और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले का चोपड़ा में अब AI तकनीक का इस्तेमाल करके सुरक्षा तंत्र को घातक बना दिया गया है.
इन 4 जगहों पर बने नए सैन्य ठिकाने
- जानकारी के मुताबिक असम के धुबरी में स्थित सैन्य स्टेशन की दूरी बांग्लादेश सीमा से करीब 30 से 40 किलोमीटर है. यहां पर 1,200 से 1,500 सैनिकों को रखने की क्षमता है. इससे इलाके में सेना की मौजूदगी और निगरानी व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है.
- इसके अलावा दूसरा सैन्य बेस वेस्ट बंगाल के चोपड़ा में बनाया गया है. यह सैन्य ठिकाना बांग्लादेश सीमा से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब होने के कारण यह जगह रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है.
- तीसरा फारवर्ड बेस बिहार के किसनगंज में बनाया गया है.
- चौथा सैन्य बेस मिजोरम के लांगतलाई जिले में परवा गांव के पास बनाया गया है, क्योंकि यह इलाका भारत, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाओं के करीब है.
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सिक्योरिटी पर भारत का खास फोकस
भारत की इस पूरी रणनीति में सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है. यह पूरा इलाका भारत के सभी सेवन सिस्टर राज्यों को जोड़ता है. यहां सैन्य जमावडा के मुख्य मकसद सुरक्षा तंत्र को ताकत देने के साथ ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है.
आखिर क्यों जरूरत पड़ी मॉडर्न टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी की..
भारत-बांग्लादेश सीमा लगभग 4,097 किमी लंबी है, जिसमें से करीब 3,240 किमी हिस्से पर बाड़ लगी है. इतनी विशाल सीमा पर मानवीय चौकसी के साथ-साथ अब AI आधारित तकनीक, थर्मल कैमरों वाले ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर्स तैनात किए गए हैं, जिससे घुसपैठ की हर हरकत तुरंत पकड़ में आ सके.
आसमान में राफेल और जमीन पर S-400 का पहरा
जमीनी मोर्चे के अलावा हवाई सुरक्षा को भी चाक-चौबंद किया गया है. पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर पहले से राफेल लड़ाकू विमानों का स्क्वाड्रन तैनात है. इसके साथ ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इर्द-गिर्द S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, भारत-इजरायल की MRSAM और स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र को मजबूत सुरक्षा कवच दिया गया है. सैन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए भूमिगत भंडारण और रॉकेट ढांचे भी तैयार किए जा रहे हैं.