IPL में क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान पर बवाल थम नहीं रहा है। केकेआर ने नीलामी में मुस्तफिजुर को खरीदा था। इसके बाद देश के कई हिस्सों में बड़े स्तर पर विरोध शुरू हो गया था। विरोध का सामना करते हुए बीसीसीआई ने शनिवार को केकेआर को रहमान को टीम से निकालने का आदेश दे दिया। इसके बाद केकेआर ने मुस्तफिजुर को रिलीज कर दिया।
अब बीसीसीआई के इस एक्शन पर इमाम एसोसिएशन का बयान सामने आया है। अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि बांग्लादेशी खिलाड़ी को नीलामी से पहले ही बाहर करने का फैसला लिया जाना चाहिए था, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश की स्थिति की जानकारी थी। यह निर्णय हिंदू-मुस्लिम रंग के आधार पर लिया गया है। शाहरुख खान की कोई गलती नहीं है क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई के नियमों और विनियमों के तहत ही खिलाड़ी को खरीदा था।
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इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि यह फैसला शाहरुख खान को बेवजह गद्दार करार देता है, जबकि उस समय कोई प्रतिबंध नहीं था। मेरा मानना है कि यह जानबूझकर किया गया है।
कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने भी रहमान के खेलने पर आपत्ति जताई थी। दोनों धर्मगुरुओं के बयान पर इमाम संघ के अध्यक्ष ने कहा था कि बांग्लादेशी IPL खिलाड़ी मुस्ताफिजुर रहमान का शाहरुख खान की टीम KKR में आना बर्दाश्त नहीं हो रहा है, क्योंकि खिलाड़ी और शाहरुख खान दोनों मुसलमान हैं। कहा था कि यह बयान मुसलमानों के खिलाफ नफरत और इस्लामोफोबिया हैं। देश के अंदर लोगों को बिना सोचे-समझे और संविधान का ज्ञान लिए विरोध करने की आदत सी हो गई है।