IIT बॉम्बे में ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की सुसाइड का मामला देशभर सुर्खियों में हैं और इस केस ने देशभर की IITs में सुसाइड केसों को फिर से उजागर कर दिया है. मामले की जांच को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच करेगी. साहिल के टीचर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ केस दर्ज हुआ है. जिन पर साहिल को जातिसूचक गालियां देने और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप है. IITs में सुसाइड की वजहों पर चर्चा छेड़ दी है. IIT दिल्ली के द्वारा बनाई गई इन्वेस्टिगेशन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में IIT स्टूडेंट्स के द्वारा मौत को गले लगाने की वजह भी बताई है. वहीं IITs में कराए गए इंटरनल सर्वे के नतीजें और आंकड़े भी काफी चौंकाने वाले भी हैं.
क्या है IITs स्टूडेंट्स सुसाइड की वजह?
IIT दिल्ली की कमेटी के अनुसार, IITs में सुसाइड की वजहों में भारी भरकम कोर्स का दबाव, अच्छे नंबर लगाने लाने का तनाव, ग्रेडिंग सिस्टम के कारण बढ़ता ‘कॉम्पिटिशन’, एकेडमिक दबाव और जाति-लिंग के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव शामिल हैं. IIT छात्र संगठनों के द्वारा भी इंटरनल सर्वे किया गया था, जिसके अनुसार IITs के 61% स्टूडेंट्स कहते हैं कि छात्रों की मौत होने या सुसाइड किए जाने की वजह पढ़ाई का तनाव (एकेडमिक स्ट्रेस) था. 12 प्रतिशत ने नौकरी को लेकर अनिश्चितता, 10 प्रतिशत ने पारिवारिक समस्याओं और 6 प्रतिशत ने उत्पीड़न (6%) को वजह बताया.
IIT बॉम्बे में 9 महीने में 3 सुसाइड केस
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, IIT बॉम्बे में साल 2026 के 9 महीनों में 3 सुसाइड केस हो चुके हैं. ताजा मामला सितंबर 2026 में 19 साल के साहिल वाकोडे की सुसाइड का है, जो एग्जाम में मोबाइल पर चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था. इससे पहले जुलाई 2026 में मैटेरियल साइंस के सेकंड ईयार के 20 वर्षीय स्टूडेंट ने अपने कमरे में फंदा लगाया था. इससे पहले फरवरी 2026 में इंजीनियरिंग के सेकंड ईयर के 21 वर्षीय स्टूडेंट ने हॉस्टल की छत से कूदकर मौत को गले लगाया था.
2005 से 2024 के बीच 115 सुसाइड केस
IIT कानपुर के एक्स स्टूडेंट धीरज सिंह ने एक RTI लगाई थी, जिसके जवाब में उन्हें बताया गया था कि साल 2005 से साल 2024 के बीच देशभर की IITs में 115 छात्रों ने सुसाइड की थी. 98 सुसाइड केस कैंपस के अंदर रिकॉर्ड हुए, वहीं 17 सुसाइड केस कैंपस के बाहर रिपोर्ट हुए. सबसे ज्यादा 26 सुसाइड केस IIT मद्रास में रिपोर्ट हुए. सूची में दूसरे नंबर पर IIT कानपुर के 18 केस, IIT खड़गपुर के 13 केस और IIT बॉम्बे के 10 केस शामिल हैं. धीरज आज ‘ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप’ के संस्थापक हैं और IITs के स्टूडेंट्स के संपर्क में रहते हैं और संस्थानों के अंदर होने वाली गतिविधियों से भी कनेक्ट रहते हैं.
पिछले 6 साल में IITs में सुसाइड केस
साल 2018 से साल 2023 तक देशभर के केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों के द्वारा सुसाइड किए जाने के कई मामले सामने आए, जिनमें IITs में हुए सुसाइड केस भी शामिल हैं. जैसे साल 2018 में 21 सुसाइड केस हुए थे, जिनमें से 8 केस IIT के थे. साल 2019 में 19 सुसाइड केस हुए थे, जिनमें से 8 केस IIT में हुए थे. साल 2020 में 7 केस सुसाइड के थे, जिनमें से 3 केस IIT में हुए थे. साल 2021 में 7 केस सुसाइड के थे, जिनमें से 4 केस IIT में हुए थे. साल 2022 में 24 केस सुसाइड के थे, जिनमें से 9 केस IIT में हुए थे. साल 2023 में 20 केस सुसाइड के थे, जिनमें से 7 केस IIT में हुए थे.
पिछले 4 साल में IIT दिल्ली में 8 सुसाइड
बता दें कि साल 2023 से साल 2026 तक 4 साल में सुसाइड के 8 केस हो चुके हैं और सभी की वजह अलग-अलग रहीं. अगस्त 2026 में डिप्रेशन और एंग्जायटी (चिंता) के कारण ऋषिकेश के MSc फिजिक्स के स्टूडेंट ने सुसाइड किया था. 12 मार्च 2026 में BTech सिविल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट हर्षित स्वामी ने जान दी थी. 4 जून 2025 को बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में PhD कर रहे आयुष सिंघल ने मौत को गले लगाया था.
22 अक्टूबर 2024 को MSc स्टूडेंट कुमार यश ने सुसाइड किया था और मनोरोग चिकित्सक उसका इलाज कर रहे थे. 15 फरवरी 2024 को फैकल्टी पर उत्पीड़न के आरोप लगाकर MTech स्टूडेंट वरद संजय नेरकर ने जान दी थी. 2 नवंबर 2023 के डिप्रेशन के चलते BTech स्टूडेंट प्रणव जैन ने सुसाइड किया था. सितंबर 2023 परीक्षा में फेल होने पर BTech स्टूडेंट अनिल कुमार ने मौत को गले लगाया था. जुलाई 2023 में परीक्षा में खराब परफॉर्मेंस के चलते BTech स्टूडेंट आयुष आशना ने सुसाइड किया था.