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'ग्लोबल वार्मिंग' में भारत का कितना योगदान? ये स्टडी खोलेगी नेपाल की आंख, आपदा के लिए मांगा था मुआवजा

Global Warming: भारत उन देशों में शामिल है जिन्होंने ‘ग्लोबल वार्मिंग’ में सबसे कम योगदान दिया है, फिर भी उष्णकटिबंधीय जलवायु और घनी आबादी जैसे कारणों से इसे इसके सर्वाधिक दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है.

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नेपाल की सुरंगों में अभी भी फंसे हैं कर्मी (Photo: PTI)

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 25 अगस्त को आए फ्लैश फ्लड में हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकी उससे अधिक लोग बेघर हो गए. तिब्बत और नेपाल को बाढ़ के चलते बड़ी जनहानि के साथ-साथ बड़ी आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ा. नेपाल को मदद पहुंचाने वाले सबसे पहले देशों में से भारत पहले नंबर पर रहा, आपदा के 12 घंटे बाद ही भारत की तरफ से मदद भेज दी गई थी. हालांकि इसके बावजूद नेपाल ने अपने घर में आई इस भीषण त्रासदी के लिए ग्लोबल वार्मिंग का हवाला भारत, चीन और अमेरिका जैसे विकसित और विकासशील देशों को जिम्मेदार ठहराया और मदद के अलावा मुआवजे की मांग की.

‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च कम्युनिकेशंस’ में पब्लिश हुई स्टडी

हालांकि बाद में नेपाल सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया कि उनकी तरफ से भारत-चीन या अमेरिका से कोई मुआवजा नहीं मांगा गया था. इन सब विवाद के बीच अब ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च कम्युनिकेशंस’ पत्रिका में प्रकाशित 2024 में भारत के ‘ग्लोबल वार्मिंग’ में योगदान की स्टडी चर्चा में आ गई है. स्टडी के मुताबिक ‘ग्लोबल वार्मिंग’ में 2024 तक भारत का योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस से भी कम रहा है. हालांकि, यह अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ और रूस जैसे अधिक उत्सर्जन करने वाले देशों की तुलना में तो कम है, लेकिन ब्राजील, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसी अन्य औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ज्यादा है.

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‘ग्लोबल वार्मिंग’ मामले में कौन सा देश सबसे आगे?

जिन देशों का विश्लेषण किया गया है उनमें से अमेरिका को ‘ग्लोबल वार्मिंग’ (वैश्विक ताप में वृद्धि) में सर्वाधिक योगदान देने वाला देश पाया गया, जिसका योगदान लगभग 0.27 डिग्री सेल्सियस था. इसके बाद चीन का स्थान है, जिसका योगदान 0.19 डिग्री सेल्सियस था. इसमें यूरोपीय संघ का योगदान 0.17 डिग्री सेल्सियस था, जबकि रूस का योगदान 0.07-0.08 डिग्री सेल्सियस था. ब्रिटेन के क्रैनफ़ील्ड विश्वविद्यालय के शोधार्थी वी.के. पटेल और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), खड़गपुर के पी.ए. टक्सल ने कहा कि भारत का अधिकतर योगदान हाल के दशकों में हुआ है और सर्वाधिक बढ़ोतरी 1990 के बाद देखी गई.

क्यों बढ़ रहा है ‘ग्लोबल वार्मिंग’?

उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा ‘ग्लोबल वार्मिंग’ में देश का कुल योगदान अभी भी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन हाल ही में हुई तेजी से बढ़ोतरी ऊर्जा प्रणाली को कार्बन मुक्त करने की बढ़ती अहमियत को दिखाती है. ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च कम्युनिकेशंस’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन से यह भी पता चला कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ऊर्जा क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की वजह से हो रही है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों के जरिए होने वाली गैर-कार्बन डाइऑक्साइड जनित ताप बढ़ोतरी (वार्मिंग) में खेती का मुख्य योगदान है. भारत के कुल योगदान में इन गैसों की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई से 20 प्रतिशत हिस्से के बराबर है.

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शोधार्थियों का कहना है कि शुरुआती दौर में औद्योगिक विकास करने वाले देशों की तुलना में भारत का गैस उत्सर्जन अत्यधिक विविध है. भारत उन देशों में शामिल है जिन्होंने ‘ग्लोबल वार्मिंग’ में सबसे कम योगदान दिया है, फिर भी उष्णकटिबंधीय जलवायु और घनी आबादी जैसे कारणों से इसे इसके सर्वाधिक दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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