महाराष्ट्र में गत 28 जनवरी को बारामती में प्लेन क्रैश हुआ था। इस हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत हो गई थी। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल सा आ गया था। एनसीपी (अजित) को अनाथ माना जाने लगा था। इसके बाद अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को एनसीपीद (अजित) विधायक दल का नेता चुना गया। साथ ही अजित पवार की जगह डिप्टी सीएम का पद सौंपा गया। अब अजित पवार की हादसे से चंद मिनट पहले की बातचीत सामने आई है।
अजित पवार चुनावी सभा के लिए बारामत गए थे। क्रैश लैंडिंग के चलते बड़ा हादसा हो गया था। लोग अजित पवार को सुनने के लिए तैयार थे लेकिन सुबह-सुबह हादसे में अजित पवार की आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई। अब एक ऑडियो क्लिप सामने आया है। इसमें अजित पवार एक पार्टी पदाधिकारी से बात कर रहे थे। बता दें कि उड़ान के दौरान जब विमान नेटवर्क क्षेत्र में आया, तब उन्होंने सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर पुणे ग्रामीण जिले के काटेवाड़ी के एक स्थानीय पार्टी पदाधिकारी को फोन किया। इसके महज कुछ मिनट बाद करीब 8:45 बजे विमान हादसे का शिकार हो गया। यानी हादसे से 8 मिनट पहले यह बातचीत हुई थी।
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यह फोन कॉल मराठी भाषा में हुई थी। अजित पवार ने यह कॉल अपने पार्टी के कार्यकर्ता श्रीजीत पवार को की थी। श्रीजीत काटेवाड़ी क्षेत्र में एनसीपी का स्थानीय पदाधिकारी बताए जा रहे हैं। दोनों के बीच यह बातचीत मराठी भाषा में हुई थी।
क्या हुई 'दादा' की आखिरी बातचीत?-
अजित पवार: हैलो
श्रीजीत पवार: हेलो दादा, नमस्कार
अजित पवार: अरे बाबा, दिगंबर दुर्गाडे कई सालों से माली समाज से जुड़े हैं। मैंने ही उन्हें पूरे जिले के जिला बैंक का चेयरमैन बनाया है। यह कोई छोटी बैंक नहीं है, इसकी अपनी अहमियत है।
श्रीजीत पवार: जी दादा
अजित पवार: बेटा, हम हमेशा सभी जाति और धर्म को साथ लेकर चलते हैं।
श्रीजीत पवार: दादा, मुझे जो जानकारी थी वही मैंने रखी थी, ताकि आपको मदद मिल सके।
अजित पवार: बात ठीक है, लेकिन माली समाज को जिला परिषद की उम्मीदवारी हमने सुपे गुट से दी है। यहां ओबीसी आरक्षण था, बाकी लोगों ने ऐसा नहीं किया। हमने वही किया जो सही लगा।
श्रीजीत पवार: ठीक है दादा, जो आपको उचित लगे वही फैसला लें।
अजित पवार: ठीक है।
सामने आई बातचीत से यह साफ झलकता है कि अजित पवार आखिरी पल तक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय थे। बातचीत में वे विभिन्न समाजों और समुदायों को साथ लेकर चलने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर जोर देते सुनाई देते हैं।
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इस ऑडियो के सार्वजनिक होने के बाद लोगों को एक बार फिर उस दुखद हादसे की याद ताजा हो गई, जिसने राज्य के एक बड़े नेता को अचानक सब से छीन लिया। फिलहाल हादसे की जांच जारी है, लेकिन अजित पवार की यह आखिरी बातचीत उनके समर्थकों और सहयोगियों के लिए एक भावुक स्मृति बन गई है, जो यह दिखाती है कि वे अंतिम क्षणों तक जनसरोकारों में ही जुड़े रहे।