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SIR फॉर्म भरने के बाद भी पहचान साबित करने बुलाया, पूर्व नौसेना चीफ ने बताई आपबीती

भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख ऐमिरल अरुण प्रकाश को चुनाव आयोग की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उनकी पहचान साबित करने को कहा गया. ऐमिरल अरुण प्रकाश ने इस पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को अपना फॉर्म ठीक करने की हिदायत दी है. क्या है पूरा मामला, पढ़िए इस रिपोर्ट में.

Credit: Social Media

देश के कई राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रकिया जारी है. जिसे लेकर आए दिन चुनाव आयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों के लिए अपनी पहचान साबित करना एक चुनौती बन गया है, हर दिन चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस भेजे जा रहे हैं. इसी कड़ी में भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख ऐमिरल अरुण प्रकाश को भी इलेक्शन कमीशन की तरफ से एक नोटिस मिला, जिसे लेकर उन्होंने आवाज उठाई है. ऐमिरल अरुण प्रकाश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि अगर SIR फॉर्म में लोगों की जानकारी को ठीक से नहीं पढ़ा जा रहा तो इसमें सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फॉर्म भरने के बावजूद भी चुनाव आयोग ने उन्हें और उनकी पत्नी को प्रत्यक्ष रूप से पेश होकर अपनी पहचान साबित करने को कहा है.

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SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

चुनाव आयोग की SIR पर सवाल उठाते हुए पूर्व चीफ ने कहा कि ये कैसी प्रक्रिया है कि नागरिकों को नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर SIR फॉर्म से पूरी जानकारी नहीं मिल रही है तो इसमें बदलाव किए जाएं. अरुण प्रकाश ने बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जब तीन बार उनके घर आया तभी उसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स मांग लेने चाहिए थे. ऐडमिरल ने कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी को अलग-अलग तारीख पर दफ्तर में हाजिर होने का कहा गया है, जोकि उनके घर से 18 किलोमीटर दूर है. अरुण प्रकाश ने कहा कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने बड़े ही ध्यान से फॉर्म भरा था, इसके बाद अब उनका नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए था.

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लंबे समय तक देश की सेवा की

ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने लंबे समय तक भारतीय नौसेना में रहकर देश की सेवा की और प्रमुख बने. 1971 के युद्ध के दौरान, उन्हें पंजाब में भारतीय वायु सेना (IAF) के फाइटर स्क्वाड्रन के साथ उड़ान भरते समय वीर चक्र से सम्मानित किया गया था. उनके कार्यकाल में सिद्धांत, रणनीति, परिवर्तन और विदेशी समुद्री सहयोग के क्षेत्रों में कई पहल शुरू की गईं. रिटायरमेंट के बाद, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य और राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के अध्यक्ष के तौर पर 2 साल तक काम किया.

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