'पहला विश्व युद्ध, 109 साल, 35000 कर्ज', क्या है ब्रिटिश सरकार को दिए लोन का मामला, चुकाने से किया गया इनकार

मध्य प्रदेश के रूठिया परिवार ने ब्रिटिश सरकार को लीगल नोटिस भेजकर 35000 रुपये का लोन ब्याज समेत वापस मांगा है. लेकिन ब्रिटिश सरकार ने लोन चुकाने से मना कर दिया है और कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, जानें क्या मामला है?

Seth Jumma Lal | British Govt | Loan Controversy

रूठिया परिवार ने ब्रिटिश सरकार को लीगल नोटिस भेजकर अपना लोन वापस मांगा है. Credit- ScreenGrab

ब्रिटेन की सरकार ने 1917 में पहले विश्व युद्ध के समय लिया कर्ज चुकाने से मना कर दिया है. ब्रिटिश सरकार को 109 साल पहले 35000 रुपये का कर्ज दिया गया था. यह कर्ज मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के मशहूर रूठिया परिवार ने दिया था. जी हां, सेठ जुम्मा लाल रूठिया ने भोपाल सियासत के प्रशासनिक कामकाज के लिए ब्रिटिश सरकार को 35000 रुपये का लोन दिया था. 109 साल बाद अक्टूबर 2026 में यह रकम ब्याज के कारण एक करोड़ से ज्यादा हो गई है. लोन को वापस पाने के लिए रूठिया परिवार ने लीगल नेटिस भेजा था, जिसका जवाब आ गया है, जिसमें लोन चुकाने से इनकार कर दिया गया है.

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ब्रिटिश सरकार ने 35000 लोन के सबूत मांगे

ब्रिटेन के लोन मैनेजमेंट ऑफिस ने ईमेल भेजकर लीगल नोटिस का जवाब दिया है, जिसमें कहा गया है कि दिए गए लोन का ऑफिशियल रिकॉर्ड या सबूत नहीं है. जबकि रूठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके पूर्वज सेठ जुम्मा लाल ने 1917 में पहले विश्व युद्ध के दौरान 35000 रुपये का लोन ब्रिटिश सरकार को दिया था. आज तक यह रकम वापस नहीं दी गई और न ही इसे वापस देने का नाम लिया गया. इसलिए जुम्मा लाल के वंशत विनय रुठिया ने वकील श्रेयांश रानीवाला के जरिए ब्रिटेन की सरकार को कानूनी नोटिस भेजा. 3 अगस्त को ब्रिटेन ने ईमेल भेजकर रूठिया परिवार से दस्तावेज, शर्तें और प्रमाण पत्र देने को कहा गया था.

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जवाब से विनय रूठिया ने जताई असंतुष्टि

विनय रूठिया ने बताया कि ब्रिटिश सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 के लीगल नोटिस का जवाब भेजा, लेकिन वे इस जवाब से खुश नहीं हैं, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने लोन चुकाने के लिए डाली गई कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. ईमेल में कहा गया है कि विनय रूठिया ने पॉलिटिकल एजेंसी के सिग्नेचर वाले डॉक्यूमेंट और सर्टिफाइड रिकॉर्ड भेजे, लेकिन ब्रिटिश सरकार के रिकॉर्ड में लोन से जुड़ा कोई डॉक्यूमेंट या रिकॉर्ड नहीं है. इसलिए ब्रिटिश सरकार लोन के लिए जिम्मेदार नहीं है. विनय रूठिया का कहना है कि ब्रिटिश सरकार को लोन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इसे चुकाने में पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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