हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

FASTag डेटा पर ED की नजर, टोल प्लाजा से संदिग्ध वाहनों की निगरानी होगी आसान

FASTag अब सिर्फ टोल भुगतान का माध्यम नहीं रहेगा. सरकार की नई योजना के तहत अधिकृत जांच और सुरक्षा एजेंसियां FASTag व ANPR कैमरों से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल संदिग्ध वाहनों की निगरानी, वाहन चोरी की जांच और अपराधियों की आवाजाही का पता लगाने में कर सकेंगी.

विज्ञापन

देश के हाईवे पर टोल भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाला FASTag अब सिर्फ टोल वसूली के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. बल्कि केंद्र सरकार इसकी मदद से वाहन चोरी, संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों पर भी निगरानी मजबूत करने की तैयारी में है. इसके तहत टोल प्लाजा पर FASTag के साथ लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल जांच और सुरक्षा एजेंसियां कर सकेंगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में पिछले सप्ताह दिशानिर्देश जारी किए हैं.

एजेंसियों को मिलेगा रियल टाइम अलर्ट

नई व्यवस्था में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस और परिवहन विभाग जैसी अधिकृत एजेंसियों को FASTag और वाहन से जुड़ा डेटा नियंत्रित तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा. खास बात यह है कि किसी संदिग्ध या ब्लैकलिस्टेड वाहन के टोल प्लाजा पर पहुंचते ही संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम अलर्ट मिल सकेगा. इससे संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने और किसी घटना के बाद उनके रास्ते का पता लगाने में मदद मिलेगी.

वाहन चोरी पर भी लगेगी लगाम

सरकार की योजना का एक अहम हिस्सा वाहन चोरी पर लगाम लगाना भी है. अधिकारियों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 1.5 लाख से 2 लाख वाहन चोरी होते हैं. इनमें आधे से ज्यादा मामले दिल्ली-एनसीआर से जुड़े होते हैं. चोरी के बाद वाहनों को कुछ ही घंटों में दूसरे राज्यों या सीमावर्ती इलाकों की ओर ले जाने की कोशिश की जाती है. कई मामलों में अपराधी किसी घटना को अंजाम देने के लिए फर्जी नंबर प्लेट या क्लोन FASTag का भी इस्तेमाल करते हैं.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें- भारत में रहकर भी जनगणना से बाहर क्यों है ये समुदाय? आखिर कहां हैं इनका घर?

ANPR कैमरे करेंगे संदिग्ध वाहन की पहचान

ऐसे मामलों में ANPR कैमरे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. कैमरा केवल नंबर प्लेट की पहचान नहीं करेगा, बल्कि वाहन के रंग, कंपनी और मॉडल का भी मिलान किया जा सकेगा. अगर FASTag में दर्ज जानकारी और सड़क पर चल रहे वाहन के वास्तविक विवरण में अंतर मिलता है, तो सिस्टम संदिग्ध वाहन की पहचान में मदद करेगा.

विज्ञापन

इस तकनीक का इस्तेमाल हिट एंड रन मामलों की जांच में भी किया जा सकेगा. हादसे के आस-पास मौजूद टोल प्लाजा के टाइम-स्टैम्प और वाहन की आवाजाही के रिकॉर्ड से जांच एजेंसियां आरोपी वाहन के संभावित रूट का पता लगा सकेंगी. इसके अलावा लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी जैसे मामलों में भी यह डेटा जांच में काम आएगा.

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध पर ही मिलेगा डेटा

हालांकि, सरकार ने डेटा की पहुंच को पूरी तरह खुला नहीं रखा है. अधिकारियों के अनुसार आम लोगों के लिए यह जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी. डेटा साझा करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तय की गई है और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध पर ही संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola