चुनाव आयोग ने 1 जनवरी 2027 की विधानसभा क्षेत्रों की वोटर्स लिस्ट के एसएसआर-2027 प्रोग्राम को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने साफ किया है कि एसएसआर से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला ड्राफ्ट प्रकाशन से लेकर फाइनल प्रकाशन तक चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा.
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह कदम मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के उद्देश्य से उठाया गया है.
सीधे आयोग के डेपुटेशन पर होंगे अफसर
आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची तैयार करने, पुनरीक्षण और संशोधन कार्य में तैनात सभी अधिकारी और कर्मचारी भारत निर्वाचन आयोग में डेपुटेशन पर माने जाते हैं. इस पूरी पुनरीक्षण अवधि के दौरान ये सभी अधिकारी सीधे आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के तहत कार्य करेंगे. आयोग के निर्देशों के तहत पुनरीक्षण अवधि के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी समेत अन्य अहम पदों को किसी भी स्थिति में खाली नहीं रखा जाएगा.
SSR में कब क्या होगा?
2 नवंबर 2026 तक वोटिंग स्टेशनों का रेशनलाइजेशन किया जाएगा. 12 नवंबर 2026 को इंटीग्रेटेड ड्राफ्ट इलेक्ट्रॉल लिस्ट पब्लिश होगी. इसके बाद, 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण 28 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा. फाइनल वोटर लिस्ट 4 जनवरी 2027 को जारी की जाएगी.
यूपी समेत 17 राज्यों में शुरू हुई प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू की है. इनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं.
आयोग ने साफ किया कि दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में एसआईआर चल रहा है या हाल ही में खत्म हुआ है, इन राज्यों में एसएसआर के लिए अलग से तारीखों का ऐलान किया जाएगा. वहीं, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश का कार्यक्रम स्थानीय मौसम को ध्यान में रखते हुए बाद में जारी होगा.