मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद एक वीडियो जारी किया है. ध्रुव राठी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने पुलिस वालों पर गंभीर आरोप लगाए और चौंकाने वाले खुलासे भी किए. ध्रुव राठी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में नहीं लिया था, बल्कि उनका ‘किडनैप’ किया था और इस दौरान उन्हें चोटें भी लगी थी. कल सुबह उन्हें गुरुग्राम पुलिस ने उनके घर से हिरासत में लिया था और अगले दिन सुबह करीब 3 बजे रिहा कर दिया. साथ ही चेतावनी दी कि अगर दोबारा जंतर-मंतर गया तो फिर से कार्रवाई की जाएगी.
पासपोर्ट दिखाते हुए खुद को भारतीय बताया
ध्रुव राठी ने पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि यह मेरा पासपोर्ट है और मैं भारतीय नागरिक हूं, आखिरी सांस तक भारतीय ही रहूंगा. मैंने जर्मनी की नागरिकता नहीं ली है और न ही मेरे पास कोई विदेशी पासपोर्ट है. भारतीय होने के नाते मुझे भी वही सब अधिकार मिले हैं, जो भारतीय को मिलते हैं. इसलिए भारतीय होने के नाते मुझे किसी भी विरोध प्रदर्शन, मार्च या रैली में शामिल होने का अधिकार है. बीते दिन हिरासत में लेने के बाद मेरे चारों तरफ करीब 15 लोगों को छोड़ दिया गया, जो मुझ पर निगरानी रख रहे थे. उन्होंने मुझे अनडिक्लेयर्ड हाउस अरेस्ट में रखा था, जिसका उन्हें अधिकार भी नहीं है.
बेडरूम में घुसकर सोते हुए उठाकर ले गए
ध्रुव राठी ने कहा कि 10 अक्तूबर 2026 दिन शनिवार की सुबह करीब 7 बजे मैं सो रहा था, तभी बेल बजी तो मेरी मम्मी ने उठकर दरवाजा खोला तो देखा कि बाहर काफी लोग घूम रहे हैं. वे पुलिसवाले नहीं थे, बल्कि सादी वर्दी में थे, जो मम्मी को धक्का मारकर घर के अंदर घुसे और मेरे बेडरूम में घुस गए. उन्होंने मुझे सोते हुए उठाया और विरोध करने के बावजूद अपने साथ ले गए. उन लोगों ने मुझे किडनैप किया और ऐसा इसलिए कहा रहा हूं, क्योंकि न तो अरेस्ट हुआ था और न ही हिरासत में लिया गया था. हिरासत में तब लिया जाता, अगर विरोध प्रदर्शन में जाता और अरेस्ट तब होता, जब पुलिस वाले लेने आते, अरेस्ट वारंट और आईकार्ड दिखाते, नेमप्लेट वाली यूनिफॉर्म पहने होते.
अपराधी जैसे घसीट कर ले जाने के आरोप
ध्रुव राठी ने कहा कि घर के बाहर 50 से ज्यादा लोग थे, जो मुझे घसीटकर ऐसे ले गए, मानो कोई हत्यारा या अपराधी हूं. इस दौरान मुझे चोटें लगी, लेकिन वे मुझे जीप में बैठाकर एक थाने में ले गए, जहां से दूसरे थाने में ले जाया गया और इस दौरान उन्होंने फोन भी छीन लिया था, इसलिए न परिजनों संपर्क कर पाया और न ही वकीलों से संपर्क किया गया. एक सवाल का जवाब दीजिए कि क्या लोकतांत्रिक देश में इस तरह जबरन घर में, बेडरूम में घुसकर किसी को हिरासत में लिया जा सकता है या गिरफ्तार किया जा सकता है? किसी के माता-पिता के मारपीट और हाथापाई करके उनके बेटे को पकड़कर ले जाया जाए? जबकि उसने सच के लिए देशहित और जनहित में आवाज उठाई हो.
अनऑफिशियल इमरजेंसी का दावा किया
ध्रुव राठी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत देश को डिक्टेटर बना दिया है. बीते दिन जिस तरह को कार्रवाई की गई हैं, उससे साफ जाहिर है कि अनऑफिशियल इमरजेंसी लगी है. कॉकरोच जनता पार्टी के टॉप लीडर्स समेत 7000 लोगों को हिरासत में लिया गया था. इस तरह के एक्शन इमरजेंसी में ही होते हैं या नॉर्थ कोरिया में होती हैं, लेकिन अब लोकतांत्रिक देश भारत में सरेआम ऐसे होने लगा है. मैं प्रधानमंत्री मोदी से कहना चाहूंगा कि किसी को इतना मत डराओ कि डर खत्म ही हो जाए. सरकार को भूख हड़ताल की चेतावनी देने के लिए सोनम वांगचुक का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं.