Delhi Race Course Masjid: दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद को गिराने का काम चार हफ्तों के लिए रोक दिया गया है. केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जब तक दिल्ली वक्फ बोर्ड की अर्जी पर कोई फैसला नहीं हो जाता, तब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी. प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित इस मस्जिद में, इस दौरान नमाजियों का जाना बंद रहेगा. मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026 को तय की गई है.
वक्फ बोर्ड की अर्जी पर होगा विचार
भूमि और विकास कार्यालय ने कोर्ट को बताया कि वो 4 हफ्तों तक मस्जिद को हटाने की कार्रवाई नहीं करेंगे. इससे वक्फ बोर्ड के तहत आने वाली इस ऐतिहासिक संपत्ति को कुछ समय के लिए राहत मिल गई है. केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि इस दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड की अर्जी पर विचार किया जाएगा और तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी.
नमाजियों पर लगी है रोक
‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने जस्टिस अनीश दयाल को बताया कि अर्जी पर फैसला ‘जितनी जल्दी हो सके, 4 हफ्तों के भीतर’ ले लिया जाएगा. कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर ले लिया. साथ ही कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता (जो एक नमाजी हैं) ने मस्जिद को गिराए जाने से बचाने की मांग की थी और नमाजियों के लिए वहां जाने पर लगी रोक को लेकर चिंता जताई थी.
फिलहाल जुमा की नमाज पर रोक
‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वो सरकार को मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, क्योंकि आसपास तोड़फोड़ का काम चल रहा है और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं हैं. कोर्ट ने सरकार की इस बात को स्वीकार कर लिया कि जब तक तोड़फोड़ का काम चलेगा, तब तक मस्जिद और पास के मंदिर में लोगों का जाना बैन रहेगा. यानी 30 अक्टूबर 2026 को यहां जुमा की नमाज नहीं पढ़ी जा सकेगी.
कोर्ट ने कहा, ‘अगर तोड़फोड़ के दौरान कोई घायल हो जाता है, तो मुआवजा कौन देगा? उन्हें (वक्फ बोर्ड की अर्जी पर) फैसला लेने दें. ये एक उचित बात कही गई है कि अर्जी पर फैसला होने तक मस्जिद को नहीं गिराया जाएगा. लेकिन हम उन्हें नमाज के लिए इजाजत देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. ये सिर्फ एक पहलू नहीं है; आप तो इस स्मारक को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.’