Aviation News: जून 2025 में बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट छूट जाने के मामले में दिल्ली के एक पैसेंजर को 71587 रुपये का मुआवजा मिला है. उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया कि एयरलाइन ये साबित नहीं कर पाई कि यात्री चेक-इन के लिए देर से पहुंचा था. नई दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि एयरलाइन अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी. कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य बारिक अहमद ने गौर किया कि एयरलाइन ऐसा कोई सीसीटीवी फुटेज या दूसरे सबूत नहीं दे पाई, जिससे ये साबित हो सके कि मुसाफिर तय समय के बाद पहुंचा था.
एयरलाइन स्टाफ पर लापरवाही का आरोप
शिकायत के मुताबिक पैसेंजर ने 22 जून और 28 जून 2025 के लिए दिल्ली-बेंगलुरु की आने-जाने की टिकट बुक की थी. उसने बताया कि वो एक जरूरी ऑफिशियल मीटिंग में शामिल होने के लिए सुबह 6:45 बजे की फ्लाइट पकड़ने के मकसद से सुबह 5:45 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गया था. हालांकि उसने आरोप लगाया कि बार-बार गुजारिश करने के बावजूद ग्राउंड स्टाफ ने उसके चेक-इन में 45 मिनट से ज्यादा की देरी कर दी. उसने ये भी दावा किया कि एक कर्मचारी ने उसे गलत जानकारी दी कि फ्लाइट पूरी तरह भर चुकी है और उसे हेल्प डेस्क पर भेज दिया, जहां उसे और भी देरी का सामना करना पड़ा और वहां के कर्मचारियों का बर्ताव भी अनप्रोफेशनल था.
अपनी ऑरिजनल फ्लाइट में न चढ़ पाने के कारण पैसेंजर ने उसी दिन बेंगलुरु पहुंचने के लिए उसी एयरलाइन से 11587 रुपये में एक और टिकट खरीदा. उसने ये भी आरोप लगाया कि 28 जून को रिटर्न फ्लाइट के वक्त एयरलाइन ने उसका चेक-इन करने से मना कर दिया, क्योंकि उसने अपनी ऑरिजनल टिकट का इस्तेमाल करके ट्रैवल नहीं किया था. बाद में ये समझाने पर कि उसने उसी एयरलाइन से दूसरा टिकट खरीदा था, उसे फ्लाइट में चढ़ने की इजाजत मिल गई.
एयरलाइंस को मुआवजा देने का निर्देश
एयरलाइन का कहना था कि यात्री सुबह 6:10 बजे चेक-इन काउंटर पर पहुंचा था और तय समय सीमा तक न पहुंचने के कारण उसे ‘नो-शो’ मान लिया गया था. हालांकि, आयोग को इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. आयोग ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह दूसरे टिकट के लिए 11587 रुपये वापस करे, मानसिक परेशानी और अपमान के लिए 50000 रुपये का मुआवजा दे, और कानूनी खर्च के तौर पर 10000 रुपये का भुगतान करे. कंपनी की तरफ से दी गई कुल राहत की राशि 71,587 रुपये थी.