देश की राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है. रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली पुलिस ने इस फैसले के पीछे की ठोस वजहें सामने रखीं. डीसीपी नेहा यादव ने पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि CJP को अनुमति न देने का मुख्य कारण उनका पिछला आचरण और नियमों की अनदेखी है. पुलिस के मुताबिक, पिछली बार प्रदर्शन की मंजूरी देते वक्त जो शर्तें और अंडरटेकिंग तय की गई थीं, आयोजकों ने उनका कतई पालन नहीं किया था.
‘पिछली बार हुई थी भारी हिंसा और आगजनी’
डीसीपी नेहा यादव ने कहा, “सीजेपी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. उन्होंने पहले दी गई अंडरटेकिंग को फॉलो नहीं किया था. जब इन्हें पिछली बार अनुमति मिली थी, तो इन्होंने कानून का पालन नहीं किया. इनके जरिए जुटाई गई भीड़ ने भारी पथराव, आगजनी और व्यापक हिंसा की थी.” डीसीपी ने कहा कि पिछली बार जुटाई गई भीड़ ने भारी पथराव, आगजनी और हिंसा की थी, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था. नियमों की अनदेखी और सुरक्षा हालात को देखते हुए जनपथ पर धरने की अर्जी खारिज कर दी गई.
अभिजीत दीपके की हिरासत पर मानवीय पहलू
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP संयोजक अभिजीत दीपके की हिरासत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई. अभिजीत दीपके की दादी के निधन के मामले पर डीसीपी नेहा यादव ने बताया कि शनिवार को उन्हें हिरासत में लिया गया था. जैसे ही पुलिस को अभिजीत दीपके की दादी के निधन की दुखद खबर मिली, अधिकारियों ने खुद जाकर उन्हें यह जानकारी दी. पुलिस ने मानवीय आधार पर उनसे पूछा कि क्या उन्हें फ्लाइट टिकट, फोन कॉल या किसी अन्य चीज में मदद चाहिए. पुलिस अधिकारियों ने बार-बार उनसे अपने माता-पिता से बात करने का आग्रह किया, लेकिन अभिजीत दीपके ने बात करने से मना कर दिया.
दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि नागरिकों की जान-माल की रक्षा और राजधानी की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है, और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी. गौरतलब है कि प्रदर्शन की मंजूरी न मिलने के बावजूद जनपथ पर धरने के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके दो साथियों को हिरासत में ले लिया था.